पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन व अन्य पुलिस कर्मचारियों के विरूद्ध न्यायालय में शिकायत दायर

पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन व अन्य पुलिस कर्मचारियों के विरूद्ध न्यायालय में शिकायत दायर

पुलिस अधीक्षक पर षड़यन्त्र रचकर वकील पर झूठा मुकदमा दर्ज करवाने का आरोप

नारनौल रवि पथ :

पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन व वकीलों के विवाद के बीच अधिवक्ता रणधावा सिंह यादव ने पुलिस अधीक्षक सहित 5 पुलिस कर्मचारियों के विरूद्ध न्यायालय में शिकायत दायर कर दी गई है। शिकायत भारतीय दण्ड संहिता की धारा 166, 167, 217, 218, 294, 323, 341, 352, 504, 506 व 120बी के तहत दायर की गई है। उक्त शिकायत में आज की तारीख थी, किन्तु आज दोपहर बाद न्यायालय के अवकाश पर चले जाने के कारण शिकायत में कल मंगलवार की तारीख दी गई है।
शिकायतकर्ता वकील रणधावा सिंह का आरोप है कि गत 2 मार्च को वह रोज की तरह अपने गाँव भुंगारका से न्यायालय आ रहा था तो महावीर चौक पर कांस्टेबल सुधीर कुमार ने उसकी मोटर साईकिल को रूकवा कर जबरन उसकी मोटर साईकिल की चाबी निकाल ली। विरोध करने पर उसके साथ गाली गलौच की थी व जान से मारने की धमकी देकर उसे उकसाया। जब वह न्यायालय में आ गया तो पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन ने बिना एफआईआर दर्ज किए एक महिला एएसआई राकेश कुमारी को न्यायालय के कार्य समय में भेज कर रणधावा सिंह को थाने में बुलवाया। जब इस बात की सूचना अधिवक्ताओं को लगी तो वो थाने में गए उस समय थाने में एसएचओ की कुर्सी पर पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन बैठे थे। अधिवक्ताओं को एसएचओ युद्धवीर सिंह ने कहा कि एसपी साहब ने उस वकील की वीडियो देखी है तथा वो बहुत गुस्से में हैं। एसएचओ ने यह भी कहा कि एसपी साहब तो वकील की अकड़ निकालने के लिए थाने में बैठे हैं। एसएचओ ने वकील की शिकायत भी नहीं ली, जिस पर वकील रणधावा सिंह ने उसी दिन एसपी चन्द्र मोहन को डाक के माध्यम से अपनी शिकायत भेज दी थी।
अधिवक्ता रणधावा सिंह का आरोप है कि उसकी शिकायत में संज्ञेय अपराध के घटक मौजूद होने पर भी पुलिस अधीक्षक ने लोकसेवक होते हुए, दोषी कर्मचारियों को विधि द्वारा मिलने वाली सजा से बचाने के लिए, कानून के द्वारा उन्हें दिए गए निर्देशों की अवहेलना की तथा दोषी पुलिस कर्मचारी पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया, अपितु उन्होंने अधिवक्ता रणधावा सिंह पर ही एक झूठा मुकदमा नम्बर 122 अन्तर्गत धारा 186/332/506 आईपीसी थाना शहर नारनौल में अपनी मौजूदगी में दर्ज करवा दिया। एसपी व एसएचओ के थाने में मौजूद होने के बाद, पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन ने आपराधिक षड़यन्त्र रचते हुए, एसएचओ से कनिष्ठ अधिकारी नसीम अखतर से एफआईआर दर्ज करवाई, जबकि कानून के अनुसार एसएचओ की मौजूदगी में केवल एसएचओ ही एफआईआर दर्ज करेगा या उससे वरिष्ठताक्रम में तत्काल नीचे का अधिकारी एफआईआर दर्ज करेगा। अधिवक्ता का आरोप है कि पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन उसे प्रताड़ित करने तथा उसे गम्भीर छति पहुँचाने की नीयत से बिना मुकदमा दर्ज किए उठवाने की मंशा रखता था, जिसका उसने प्रयास भी किया। उसका यह भी आरोप है कि उसके विरूद्ध उक्त झूठा मुकदमा पुलिस अधीक्षक ने अपने अधिनस्थ पुलिस कर्मचारियों के साथ आपराधिक षड़यन्त्र रच कर दर्ज करवाया है।
अधिवक्ता द्वारा दायर किए गए उक्त इस्तगासा में पुलिस अधीक्षक चन्द्र मोहन आईपीएस, सुधीर कुमार कांस्टेबल, महिला एएसआई राकेश कुमारी, एएसआई नसीम अख्तर व तत्कालीन एसएचओ/एसआई युद्धवीर सिंह को आरोपी बनाया है।
इससे पूर्व 1 अप्रेल को अधिवक्ताओं ने बार प्रधान यशवंत यादव एडवोकेट की अगुवाई में महावीर चौक तक मोर्चा निकाल कर पुलिस अधीक्षक का पुतला फूंका था तथा 7 अप्रेल को नारेबाजी करते हुए जिला कष्ट निवारण समिति के अध्यक्ष जय प्रकाश दलाल, मंत्री हरियाणा सरकार को ज्ञापन सौंपा था।
बार प्रधान यशवंत यादव ने बताया कि आज कुछ जनप्रतिनिधियों का संदेश आया था कि वे आज महेन्द्रगढ़ में एक कार्यक्रम में तथा स्वामी शरणानन्द जी की प्रतीमा अनावरण में व्यस्त हैं, इसलिए जनप्रतिनिधियों के रवैये को लेकर बुलाई जाने वाली बैठक को आज उनके अनुरोध पर टाल दिया गया है। आगामी कार्रवाई जैसा बैठक में तय होगा, उसके अनुसार की जाएगी।