एनजीटी ने दिए 72 क्रेशरों को तुरन्त प्रभाव से बन्द करने के आदेश

एनजीटी ने दिए 72 क्रेशरों को तुरन्त प्रभाव से बन्द करने के आदेश

किसी भी इंडस्ट्री का चलना उस क्षेत्र के लोगों के स्वच्छ वायु में सांस लेने व जीने के अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता: जस्टिस गोयल

नारनौल   रवि पथ :

महेंद्रगढ़ जिले में अनियमित स्टोन क्रेशर व पर्यावरण प्रदूषण के खिलाफ चल रहे मामले में एनजीटी ने वीरवार को अपना फैसला सुनाते हुए जिले के विवादित 72 स्टोन क्रेशरों को तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश जारी किए हैं। इस मामले की सुनवाई पर एनजीटी के चेयरपर्सन जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने लगभग डेढ़ वर्ष पहले 24 जुलाई 2019 को दिए अपने फैसले को यथावत रखते हुए सभी 72 स्टोन क्रेशरों को तुरंत प्रभाव से बंद करने के आदेश दिए हैं, इसके लिए जिला उपायुक्त की जिम्मेदारी तय की गई है। इसके साथ ही उन्होंने स्टोन क्रेशरों की वहन क्षमता पर आदेश देते हुए कहा है कि एक निश्चित क्षेत्र में एक सीमा से अधिक स्टोन क्रेशर खड़े करना उस क्षेत्र की वहन क्षमता के खिलाफ है। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल ने अपने फैसले में आगे बताया कि जिला प्रशासन दूरी मापदंड की अवहेलना कर रहे सभी 72 स्टोन क्रेशरों को बंद करने के साथ-साथ वहन क्षमता, डार्क जोन सहित कई पहलुओं पर 8 अप्रैल 2021 से पहले-पहले पूरी कार्रवाई कर उसकी रिपोर्ट एनजीटी को सौंपे। उन्होंने महेंद्रगढ़ जिले के प्रदूषण प्रभावित क्षेत्र में लोगों के स्वास्थ्य की जांच करने व इससे संबंधित पूरी रिपोर्ट सौंपने के आदेश भी जिला प्रशासन व हरियाणा सरकार को दिए हैं। उन्होंने कहा कि महेंद्रगढ़ जिले के अंदर ईट-भट्ठों की संख्या भी पर्यावरण की वहन क्षमता के हिसाब से ज्यादा है तो स्टोन क्रेशरों को क्षेत्र की वहन क्षमता को दरकिनार करके चलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। उन्होंने कहा कि किसी भी इंडस्ट्री का चलना उस क्षेत्र के लोगों के स्वच्छ वायु में सांस लेने व जीने के अधिकार से बड़ा नहीं हो सकता। इसीलिए उन्होंने 24 जुलाई 2019 के 72 स्टोन क्रेशरों को तुरंत बंद करने व उस आदेश के सभी पहलुओं को यथावत रखने के आदेश दिए हैं।
बड़ा व ऐतिहासिक है एनजीटी का फैसला: तेजपाल
सामाजिक कार्यकर्ता व याचिकाकर्ता इंजीनियर तेजपाल यादव ने फैसले।पर खुशी प्रकट करते हुए कहा है कि महेंद्रगढ़ जिले के 72 स्टोन क्रेशरों को बंद करने के साथ-साथ पूरे जिले के पर्यावरण प्रदूषण से प्रभावित क्षेत्र में लोगों के स्वास्थ्य की जांच होना हरियाणा के पर्यावरण इतिहास में एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने कहा है कि अगर प्रशासन ने निष्पक्ष रूप से स्वास्थ्य जांच की और लोग इन क्रेशरों द्वारा फेलाए जा रहे प्रदूषण के कारण से टी.बी., दमा, अस्थमा, सिल्कॉसिस, चर्म रोग व सांस लेने में तकलीफ आदि बीमारियों से प्रभावित मिले तो वे माननीय कोर्ट से मांग करेंगे कि हरियाणा सरकार व पूंजीपति वर्ग द्वारा इनके स्वास्थ्य की पूर्ति हेतु मुआवजा दिलवाया जाए। उन्होंने कहा कि इस आदेश से क्षेत्र की जनता को पर्यावरण प्रदूषण से निजात मिलेगी।


क्या था 24 जुलाई 2019 के आदेश में:
सामाजिक कार्यकर्ता तेजपाल यादव ने लगभग अढाई वर्ष पहले वरिष्ठ अधिवक्ता राजकुमार के माध्यम से एन.जी.टी. कोर्ट में स्टोन क्रेशरों व पर्यावरण प्रदूषण के विरोध में याचिका दायर करके अपने सामाजिक व कानूनी जन संघर्ष की शुरुआत की थी। जिस पर आगे सुनवाईयों में तीन क्रेशरों की एन.ओ.सी. रद्द करने व पूरे महेंद्रगढ़ जिले के सभी स्टोन क्रेशरों की जांच करने के आदेश दिए गए थे।