नागरिक सेवाओं में देरी करने वाले अधिकारियों को मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता की दो टूक, जिम्मेदारी समझें अन्यथा कड़ी कार्रवाई के लिए रहें तैयार

नागरिक सेवाओं में देरी करने वाले अधिकारियों को मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता की दो टूक, जिम्मेदारी समझें अन्यथा कड़ी कार्रवाई के लिए रहें तैयार

हरियाणा सेवा का अधिकार अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए विभागाध्यक्षों की बैठक ली

हिसार, 16 सितंबर  रवि पथ :

हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग के मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने कहा है कि अधिनियम के दायरे में आने वाली सेवाओं के विस्तार के लिए जल्द ही 10 अन्य सेवाओं को भी आरटीएस के दायरे में लाया जाएगा। वे वीरवार को गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय में प्रशासनिक अधिकारियों, संबंधित विभागों के अध्यक्षों तथा जिले के गणमान्य नागरिकों की बैठक को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने बताया कि जल्द ही आयुष्मान भारत, प्रॉपर्टी आईडी, परिवार पहचान पत्र में संशोधन, सीवरेज कनेक्शन, खाद व फसल विविधीकरण प्रोत्साहन योजनाओं, मनरेगा, स्वामित्व योजना के तहत किए गए पंजीकरण में शुद्धीकरण, छात्रों को प्रदान की जाने वाली मार्कशीट, डिग्री व स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, महिलाओं व बच्चों के टीकाकरण जैसी विभिन्न योजनाओं को सेवा का अधिकार अधिनियम में शामिल किया जाएगा। इस अवसर पर उन्होंने विभागाध्यक्षों के लिए सख्त हिदायत के साथ कुछ लक्ष्य भी निर्धारित किए। उन्होंने निर्देश दिए कि सेवाओं के निपटान के मामले में विभागों का स्कोर 10 में से कम से कम 9.9 होना चाहिए। इसके अतिरिक्त नागरिकों से सेवाओं के संबंध में ली जाने वाली प्रतिक्रिया के मामले में भी 5 में से कम से कम 4 अंक होने चाहिए।
मुख्य आयुक्त ने कहा कि 31 अक्टूबर तक सभी विभाग वर्ष 2020 तक की लंबित सेवाओं के मामलों का निपटान करना सुनिश्चित करें। उन्होंने यह भी हिदायत दी कि विभाग नागरिकों को प्रदान की जाने वाली विभिन्न सेवाओं के मामले में रिजेक्शन रेट को भी कम से कम करें। यदि इन बिंदुओं पर किसी भी अधिकारी की लापरवाही पाई गई तो उन्हें समन कर मुख्यालय बुलाया जाएगा। ऐसे मामलों में 20 हजार रुपये तक की पेनल्टी लगाई जाएगी और यदि किसी एक अधिकारी पर 3 बार इस प्रकार की पेनल्टी लग गई तो उन्हें नौकरी से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा। अभी तक लापरवाही के मामलों में आयोग ने 250 अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।
मुख्य आयुक्त टीसी गुप्ता ने कहा कि फिलहाल 31 विभागों की 546 सेवाओं को आरटीएस में सूचीबद्ध किया गया है, जिनमें से 277 सेवाएं अंत्योदय सरल, 184 ऑनलाइन पोर्टल तथा 85 ऑफलाइन सेवाएं हैं। ऑफलाइन सेवाओं को भी जल्द ही आनलाइन कर सेवा का अधिकार अधिनियम के दायरे में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार व राज्य सेवा अधिकार आयोग का मुख्य लक्ष्य आम जनमानस तक सरकारी सेवाओं तथा योजनाओं का पूर्ण लाभ समयबद्ध अवधि में पहुंचाना है। सरकारी सेवाओं का लाभ मिलने में लोगों को कोई परेशानी न हो और विभागीय कार्य सुगम व पारदर्शी तरीके से हो। सेवा अधिकार के तहत योजनाओं का समयबद्ध अवधि में लाभ न पहुंचाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। आवेदनों को ठोस कारण के बिना रद्द किये जाने पर भी कड़ा संज्ञान लिया जाएगा। बैठक में उन्होंने ऐसे अधिकारियों को कड़ी चेतावनी भी दी, जिनके पास लंबित आवेदनों की संख्या अधिक है। विशेष रूप से एग्रीकल्चर मार्केटिंग बोर्ड, बिजली, वेलफेयर ऑफ एससी-बीसी, एचएसवीपी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी, महिला एवं बाल विकास, श्रम विभाग, शहरी स्थानीय निकाय विभाग के अधिकारियों को उन्होंने सुधार के लिए निर्देश दिए। इस अवसर पर मुख्य आयुक्त ने गणमान्य नागरिकों से भी सेवाओं के सम्बंध में प्रतिक्रिया ली।
मुख्य आयुक्त ने कहा कि सेवाओं में जानबूझकर लापरवाही करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही को सुनिश्चित करने के लिए हाल ही में ऑटो अपील सिस्टम विकसित किया गया है जिसमें सेवाओं में की जाने वाली देरी के मामलों में स्वयं ही अपील फाइल होगी। इसके अतिरिक्त जल्द ही एक कॉल सेंटर की स्थापना भी की जाएगी, जिसमें देरी के मामलों में आवेदक फोन करके अपनी शिकायत दर्ज करवा सकेंगे। उन्होंने कहा कि नागरिक आरटीएससी-एचआरवाई डॉट जीओवी डॉट आईएन पर भी अपनी शिकायत आयोग को कर सकते हैं।
इस अवसर पर अपने संबोधन में हिसार मंडल के आयुक्त चंद्रशेखर ने अधिकारियों से कहा कि वे अपने काम को जुनून के साथ करें। दैनिक आधार पर कार्य लंबित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह बात सत्य है कि जिस तरह से सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों की सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है, उसके मुकाबले उनकी कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हुआ है। इसलिए अधिकारी-कर्मचारी नागरिक सेवाओं को अपना नैतिक कर्तव्य समझें।
अपने संबोधन में उपायुक्त डॉ प्रियंका सोनी ने सेवा का अधिकार अधिनियम के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि नागरिकों के लिए यह अधिनियम एक मजबूत माध्यम है, जिसके द्वारा उन्हें समय बद्ध सेवाएं मिलती है। उन्होंने बैठक में उपस्थित सभी विभागाध्यक्ष को हिदायत दी कि वे अपनी कार्य प्रणाली में सुधार करें। मेयर गौतम सरदाना ने कहा कि सेवा का अधिकार अधिनियम सरकार का महत्वाकांक्षी अभियान है। उन्होंने सुझाव दिया कि नागरिकों को अधिनियम के तहत विभिन्न सेवाओं की जानकारी देने के लिए जिले के विभिन्न वार्ड तथा बूथों के अनुसार प्रशिक्षित करने हेतु कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाए। सेवा का अधिकार आयोग की मुख्य सचिव मीनाक्षी राज ने कहा कि बैठक में उपस्थित अधिकारी आत्ममंथन करके जाएं। यदि वे अपना कार्य इमानदारी और बेहतर ढंग से करेंगे तो इससे लोगों का जीवन आसान बनेगा। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को केवल नौकरी करने की बजाय लोक सेवा के भाव से कार्य करना होगा। इस अवसर पर नगर निगम आयुक्त अशोक गर्ग, एसपी नितिका गहलोत, अतिरिक्त उपायुक्त स्वप्निल रविंद्र पाटिल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे।