राजस्थान में पशुओं के लिए खुलेंगे 500 मैत्री केंद्र, युवाओं को मिलेंगे नौकरी के अवसर

राजस्थान में पशुओं के लिए खुलेंगे 500 मैत्री केंद्र, युवाओं को मिलेंगे नौकरी के अवसर

जयपुर  रवि पथ  –

प्रदेश के युवाओं को रोजगार देने और पशुओं को बेहतर इलाज देने के लिए गहलोत सरकार के पशुपालन विभाग ने नौकरियों का पिटारा खोला है. राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ भवानी सिंह राठौड़ की और से राज्य पशुपालन विभाग के सभी जिला संयुक्त निदेशकों को आज जारी एक पत्र में कृत्रिम गर्भाधान विषय को लेकर 500 मैत्री केंद्र स्थापित करने का निर्देश जारी किया गया है. इस जारी किए गए पत्र में डॉ राठौड़ ने जिला संयुक्त निदेशकों को लिखा है कि प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान कार्य को बढ़ावा देने एवं इसके कार्यक्षेत्र का विस्तार करने हेतु भारत सरकार के राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत पाँच सौ मंत्री केंद्र स्थापित किए जाने हैं और इस से 500 युवाओं को रोजगार मुहैया करवाया जाएगा. इस योजना में जिस भी क्षेत्र में एक हजार प्रजनन योग्य मादा पशु उपलब्ध हैं और तीन किलोमीटर के दायरे में कोई भी पशु हस्पताल या संस्था कार्यरत नहीं है वहां एक मैत्री केंद्र स्थापित किया जाएगा. राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ भवानी सिंह राठौड़ ने बताया कि सभी जिला अधिकारियों को आगामी सात दिन में ऐसी ग्राम पंचायतों का चयन कर उनकी सूची कार्यालय में सौंपने के निर्देश जारी किए हैं.

आखिर क्या होती है मैत्री (MAITRI)

पशुपालन एवं डेयरी विभाग भारत सरकार की पशुओं में नस्ल सुधार को लेकर चलाई जा रही विभिन्न कार्य योजनाओं में मैत्री (MAITRI) भी एक है जिसका पूरा शाब्दिक अर्थ मल्टीपर्पज आर्टिफिशियल इनसेमिनेशन टेक्निशियन इन रूरल इंडिया है. इन मैत्री वर्करों को एआई वर्कर भी कहा जाता है जिनका काम दूर ग्रामीण अंचल में बसे पशुपालकों को उनके घर द्वार पर जाकर कृत्रिम गर्भाधान एवं पशु प्राथमिक उपचार की सुविधाएं प्रदान कराना होता है.

बेरोजगार युवा यहाँ से ले सकते हैं मैत्री ट्रेनिंग

पढ़े लिखे बेरोजगार युवा मैत्री ट्रेनिंग लेने के लिए भारत सरकार के पशुपालन विभाग से एक्रीडिटेशन प्राप्त एआईटीआई, कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थान में 90 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर सकते है जिसमें उन्हें तीस दिन का प्रायोगिक एवं सिद्धांतिक प्रशिक्षण अनुभवी चिकित्सकों द्वारा दिया जाता है साथ ही 60 दिन तक उन्हें फील्ड में जानकारी बढ़ाने के लिए किसी अनुभवी प्रैक्टिशनर के साथ इंटर्नशिप पर भेजा जाता है. बाद में मूल्यांकन कर उन्हें पशुपालन विभाग के द्वारा तय किए गए मापदंडों के आधार पर सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है.

राज्य में 22699 मैत्री वर्करों की जरूरत के मुकाबले 7540 ही हैं उपलब्ध

प्रदेश में पशुपालकों को उनके घर द्वार पर कृत्रिम गर्भाधान एवं पशु प्राथमिक चिकित्सा उपलब्ध करवाने के लिए 22693 मैत्री वर्करों की आवश्यकता है लेकिन उनमें से मात्र 7540 ही सर्टिफाइड कार्यकर्ता उपलब्ध है. इस विषय को लेकर भारत सरकार के मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के संयुक्त सचिव माहिर कुमार सिंह ने पिछले वर्ष जून में राजस्थान पशुपालन विभाग को एक पत्र लिखकर इस बारे नाराजगी भी जताई थी और साथ ही उन्हें इस में तेजी लाने के निर्देश भी दिए थे. मिहिर कुमार सिंह ने अपने 11 जून 2020 को लिखे पत्र में साफ तौर पर लिखा है कि एक हजार से अधिक प्रजनन योग्य मादा पशुओं की उपलब्धता वाली ग्राम पंचायतों को चिन्हित कर वहां के युवाओं को रोजगार के अवसर देते हुए मैत्री केंद्र खोले जाएं. इसी कड़ी में अब पांच सौ मैत्री केंद्रों को खोलने बाबत चिट्ठी आज राजस्थान पशुधन विकास बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉक्टर भवानी सिंह राठौड़ के द्वारा जारी की गई. इसके बावजूद भी हजारों की संख्या में रोजगार के अवसरों से परिपूर्ण मैत्री केंद्र प्रदेश के युवाओं के लिए इंतजार कर रहे हैं ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके और पशुपालकों को उनके घर पर ही सुविधाएं मुहैया करवाई जा सके.

योग्यता एवं आवेदन का तरीका

मैत्री केंद्र में आवेदन हेतु युवा की उम्र 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए और वह कम से कम 10 वीं पास होने के साथ-साथ उसके पास भारत सरकार के पशुपालन मंत्रालय से अधिकृत किसी भी कृत्रिम गर्भाधान प्रशिक्षण संस्थान से वैद्य मैत्री ट्रेनिंग का 3 माह का सर्टिफिकेट होना चाहिए.