अग्रिपथ योजना से सेना का पूरा प्रशासनिक और अनुशासनिक ढांचा तहस नहस हो जाएगा: अभय सिंह चौटाला

अग्रिपथ योजना से सेना का पूरा प्रशासनिक और अनुशासनिक ढांचा तहस नहस हो जाएगा: अभय सिंह चौटाला

सिपाही भर्ती होकर लांस नायक फिर नायक फिर हवलदार फिर नायब सूबेदार फिर सूबेदार और अंत में सूबेदार मेजर तक पद्दोनति पाता है

अग्रिपथ योजना के तहत सिपाही सिर्फ चार साल के लिए ही नौकरी कर पाएगा तो फिर अग्रिपथ योजना से सेना के नॉन कमिशंड वर्ग में पद्दोनति प्रणाली ही खत्म हो जाएगी

अग्रिपथ योजना के तहत भर्र्ती हाने वाले सिपाहियों को भूतपूर्व सैनिक का दर्जा भी नहीं मिलेगा जिस कारण उन्हें नौकरी का कोटा मैडिकल, कैंटीन के साथ-साथ और भी जो सुविधाएं भूतपूर्व सैनिकों को मिलती हैं वो नहीं मिलेंगी

जैसे बिना सोचे समझे बनाए गए कृषि कानूनों को किसानों के विरोध के बाद वापिस लेना पड़ा था वैसे ही इस युवा विरोधी अग्रिपथ योजना को भी हर हाल में वापिस लेना पड़ेगा

चंडीगढ़, 17 जून रवि पथ :

इनेलो के प्रधान महासचिव एवं ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला ने कहा कि अग्रिपथ योजना लागू करने के दुष्परिणामों के बारे में उन्होंने सबसे पहले आगाह कर दिया था कि यह योजना सेना में भर्ती होने वाले युवाओं के लिए घातक सिद्ध होगी। चूंकि नान गजटेड आफिसर और जेसिओ की सीधी भर्ती नहीं होती है, सेना में जब सिपाही भर्ती होता है तो वह पद्दोनति पाकर सूबेदार मेजर तक पहुंचता है। सिपाही भर्ती होकर लांस नायक, फिर नायक, फिर हवलदार, फिर नायब सूबेदार, फिर सूबेदार और अंत में सूबेदार मेजर तक पद्दोनति पाता है।
सेना में अनुशासन बनाने के लिए सिपाही एक कड़ी का काम करता है। इसी कड़ी में कमांडिंग आफिसर सूबेदार मेजर को आदेश देता है और सूबेदार मेजर पूरी बटालियन को लड़ाई लड़ने के लिए तैयार करता है। अग्रिपथ योजना के तहत सिपाही सिर्फ चार साल के लिए ही नौकरी कर पाएगा तो फिर अग्रिपथ योजना से सेना के नॉन कमीशंड वर्ग में पद्दोनति प्रणाली ही खत्म हो जाएगी और सेना का पूरा प्रशासनिक और अनुशासनिक ढांचा तहस नहस हो जाएगा।
अग्रिपथ योजना के तहत भर्र्ती हाने वाले सिपाहियों को भूतपूर्व सैनिक का दर्जा भी नहीं मिलेगा जिस कारण उन्हें नौकरी का कोटा मेडिकल, कैंटीन के साथ साथ और भी जो सुविधाएं भूतपूर्व सैनिकों को मिलती हैं वो नहीं मिलेंगी क्योंकि भूतपूर्व सैनिक दर्जा पाने के लिए पांच साल की नौकरी होना अनिवार्य है।
कोई भी कानून सोच समझ कर बनाया जाता है लेकिन भाजपा सरकार कानून बनाने के बाद सोचती है जिसके परिणाम बेहद खतरनाक होते हैं। पहले जीएसटी और नोटबंदी को बिना सोचे समझे लागू कर देश को आर्थिक रूप से बेहद नाजुक स्थिति में पहुंचा दिया। जैसे बिना सोचे समझे बनाए गए कृषि कानूनों को किसानों के विरोध के बाद वापिस लेना पड़ा था वैसे ही इस युवा विरोधी अग्रिपथ योजना को भी हर हाल में वापिस लेना पड़ेगा।