फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आरंभ की गई सेंट्रल सैक्टर योजना के बेेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए : अतिरिक्त सचिव डॉ अभिलक्ष लिखी

फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आरंभ की गई सेंट्रल सैक्टर योजना के बेेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए : अतिरिक्त सचिव डॉ अभिलक्ष लिखी

अवशेष जलाने की घटनाओं में वर्ष 2016 के मुकाबले वर्ष 2020 में हरियाणा में 64 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश 52 प्रतिशत और पंजाब में 23 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई

हिसार, 10 नवंबर  रवि पथ :

भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त सचिव डॉ अभिलक्ष लिखी ने कहा है कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण हेतू फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए आरंभ की गई सेंट्रल सैक्टर योजना के बेेहद सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि योजना के सफल क्रियान्वयन से वर्ष 2016 के मुकाबले वर्ष 2020 में हरियाणा, उत्तर प्रदेश और पंजाब राज्य में धान के अवशेष जलाने की घटनाओं की संख्या में क्रमश: 64 प्रतिशत, 52 प्रतिशत और 23 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। अतिरिक्त सचिव डॉ अभिलक्ष लिखी ने किसानों से आह्ïवान किया है कि वे इस वर्ष भी अपने फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करें, ताकि प्रदूषण के स्तर में और अधिक कमी लाई जा सके। इस मौके पर उन्होंने उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान में इन-सीटू और एक्स-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के लिए उपयोग की जाने वाली मशीनों और उपकरणों का निरीक्षण करते हुए किसानों के साथ बातचीत भी की और उनकी प्रतिक्रियाएं ली।
अतिरिक्त सचिव डॉ अभिलक्ष लिखी ने कहा है कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण के नियंत्रण और फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए जरूरी मशीनरी को सब्सिडी पर देने हेतू कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में सेंट्रल सैक्टर योजना वर्ष 2018-19 में शुरू की थी। इसके तहत फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की खरीद के लिए व्यक्तिगत तौर पर किसानों को लागत का 50 प्रतिशत और परियोजना लागत का 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है। यह अनुदान व्यक्तिगत तौर के अलावा किसानों की सहकारी समितियों, पंजीकृत किसान समितियों, एफपीओ और पंचायतों को कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना के लिए दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि योजना का लक्ष्य सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, जीरो टिल सीड एवं फर्टिलाइजर ड्रिल, मल्चर, पैडी स्ट्रॉ चॉपर, हाइड्रॉलिक रिवर्सिबल मोल्ड बोर्ड हल, क्रॉप रीपर और रीपर बाइंडर जैसी मशीनों के उपयोग से इन-सीटू प्रबंधन को बढ़ावा देना है। योजना के तहत एक्स-सीटू फसल अवशेष प्रबंधन के लिए बेलर और हेरक जैसी मशीनों के उपयोग को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
योजना के तहत फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के लिए चालू वर्ष 2021-22 के दौरान 690.90 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इनमें पंजाब के लिए 331.94 करोड़ रुपये, हरियाणा के लिए 193.35 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश के लिए 159.59 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसमें आईसीएआर के 6.02 करोड़ रुपये शामिल है। 2021-22 में व्यक्तिगत तौर पर किसानों को 25 हजार 831 मशीनों की आपूर्ति करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें पंजाब के लिए 8 हजार 660 उपकरण, हरियाणा के लिए 10 हजार 11 और उत्तर प्रदेश के लिए 7 हजार 160 उपकरण शामिल है। इसी प्रकार से इन राज्यों में इन-सीटू व एक्स-सीटू प्रबंधन के लिए 9 हजार 530 कस्टम हायरिंग सैैंटर स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें पंजाब के लिए 6152, हरियाणा के लिए 1678 और उत्तर प्रदेश के लिए 1700 कस्टम हायरिंग सैैंटर शामिल है।
अतिरिक्त सचिव ने बताया कि वर्ष 2018-19 से 2020-21 के दौरान किसानों को सब्सिडी पर फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों के वितरण, कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना और फसल अवशेष प्रबंधन पर किसानों को जागरूक करने के लिए 1749.17 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इनमें पंजाब के लिए 815.68 करोड़ रुपये, हरियाणा के लिए 499.90 करोड़ रुपये, उत्तर प्रदेश के लिए 374.08 करोड़ रुपये, दिल्ली एनसीटी (राष्टï्रीय राजधानी क्षेत्र) के लिए 4.52 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया। इसके अलावा आईसीएआर और अन्य केंद्रीय एजेंसियों द्वारा भी 54.99 करोड़ रुपये जारी किए गए।
उन्होंने बताया कि इन निधियों से पिछले 3 वर्षों के दौरान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीटी (राष्टï्रीय राजधानी क्षेत्र) के छोटे और सीमांत किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के लिए किराये पर मशीन और उपकरण प्रदान करने हेतू 30 हजार 900 कस्टम हायरिंग सैंटर स्थापित किए गए। इनमें पंजाब में 21 हजार 126, हरियाणा में 4 हजार 224 और उत्तर प्रदेश में 5 हजार 611 से अधिक कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन 4 राज्यों में कस्टम हायरिंग सेंटर तथा व्यक्तिगत तौर पर किसानों को कुल 1.58 लाख फसल अवशेष प्रबंधन मशीनों की आपूर्ति की गई है। इनमें पंजाब को 75 हजार 355, हरियाणा को 40 हजार 55, उत्तर प्रदेश को 42 हजार 563 और दिल्ली एनसीटी में 162 मशीनें दी गई हैं, जिसमें 1530 से अधिक बेलर शामिल हैं। पंजाब को 463, हरियाणा को 801 और उत्तर प्रदेश को 269 बेलर दिए गए हैं। इस अवसर पर उत्तरी क्षेत्र फार्म मशीनरी प्रशिक्षण एवं परीक्षण संस्थान के निदेशक डॉ मुकेश जैन व अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।