पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कुशल नेतृत्व में देश की बहादुर सेना ने 1971 में पाकिस्तान पर विजय प्राप्त की : बजरंग गर्ग

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कुशल नेतृत्व में देश की बहादुर सेना ने 1971 में पाकिस्तान पर विजय प्राप्त की : बजरंग गर्ग

निर्वाचित बांग्लादेश का खुला समर्थन करना इंदिरा गांधी के राजनीतिक कैरियर का सबसे बड़ा फैसला में एक था : बजरंग गर्ग

इंदिरा गांधी के आदेश पर भारतीय फौजियों ने 3 दिसंबर को पाकिस्तान में प्रवेश कर नया बांग्लादेश देश बनाकर ही वापिस लौटे : बजरंग गर्ग

भारत देश ने युद्ध विराम बांग्लादेश बनाने के बाद 17 दिसंबर को किया- बजरंग गर्ग

हिसार  रवि पथ :

अखिल भारतीय कांग्रेस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती सोनिया गांधी व प्रदेश अध्यक्ष कुमारी सैलजा के निर्देशानुसार 1971 में बांग्लादेश की मुक्ति संग्राम की 50वीं वर्षगांठ उत्साहपूवर्क मनाई गई। इसमें भारी संख्या में कांग्रेस के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस अवसर पर कांग्रेस पार्टी के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता व जिला कन्वीनर बजरंग गर्ग ने उपस्थित प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि 1971 संग्राम में शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के कुशल नेतृत्व में देश की बहादुर सेना ने पाकिस्तान देश पर विजय प्राप्त करते हुए बांग्लादेश का गठन करने का कार्य किया। वास्तव में 1971 में बांग्लादेश के लिए प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी का पूरा समर्थन हर तरीके से था। भारत ने सांस्कृतिक, सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बांग्लादेश का समर्थन किया। श्रीमती इंदिरा गांधी ने भारत की गुट निरपेक्ष आंदोलन की विचारधारा से समझौता करते हुए कदम उठाया था। यहां तक कि इंदिरा गांधी को तब अहसास था कि पश्चिम पाकिस्तान के अमेरिका के साथ रिश्ते कितने मजबूत है और चीन भी उस क्षेत्र में बड़ी भूमिका निभा रहा था। यहां तक कि निवार्सित बांग्लादेश का खुला समर्थन करना पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के राजनीतिक कैरियर का सबसे बड़े फैसलों में से एक था। इंदिरा जी के इस फैसले से कूटनीतिक, विवेक, संयम और कौशल की छाप थी जबकि पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अमेरिका की चेतावनी की परवाह किए बगैर भारतीय फौजों को पूर्वी पाकिस्तान भेजा।
बजरंग गर्ग ने कहा कि इंदिरा गांधी के आदेश पर भारतीय फौजियों ने 3 दिसंबर को पाकिस्तान में प्रवेश किया फिर वहां नया बांग्लादेश बनाकर ही लौटे। अमेरिका ने भारत के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सातवां बेड़ा हिंद महासागर भेज देने तक की धमकी दी मगर इंदिरा गांधी ने धमकी के बाद भी अलग बांग्लादेश बनाने का काम किया। इंदिरा जी ने यह कदम इसलिए उठाया था क्योंकि पाकिस्तान की फौज की दमनकारी के कारण भारी संख्या में बांग्लादेशी शरणार्थी भागकर भारत आ रहे थे जिसका असर भारत देश पर पड़ रहा था। भारत देश में संघर्ष विराम बांग्लादेश बनाने के बाद 17 दिसंबर को किया।
इस अवसर पर हरियाणा कांग्रेस लीगल सेल के चेयरमैन लाल बहादुर खोवाल ने कहा कि बिहार, यूपी, असम, नागालैंड व त्रिपुरा आदि कई राज्यों ने स्वतंत्र बांग्लादेश बनाने के समर्थन में अपनी-अपनी विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने शुरू कर दिए। केंद्र सरकार ने भी संसद में कहा था कि हम मान्यता के खिलाफ नहीं है जबकि केंद्र सरकार से पहले ही भारत की अनेक राज्यों की सरकारें बांग्लादेश को मान्यता देने के लिए कदम उठाने लग गई थी।