जबरन कॉविड वैक्सीनेशन पर बगलें झांकने लगा जिला प्रशासन

जबरन कॉविड वैक्सीनेशन पर बगलें झांकने लगा जिला प्रशासन

हिसार 27, जनवरी  रवि पथ :

हिसार के नागरिक जबरन कॉविड वैक्सीनेशन के बारे में जिला प्रशासन से स्पष्टीकरण हेतु आज जिलाधीश से मिलने गए लेकिन कल एक दिन पूर्व करीब 15 नागरिकों ने विषय सहित ईमेल किए जाने के बावजूद जिलाधीश हिसार अपने कार्यालय में मौजूद नहीं मिली। जिलाधीश का कार्यालय में मौजूद ना रहना जिला प्रशासन का गैर जिम्मेवाराना वाला रवैया दर्शाता है।

जिलाधीश कार्यालय में पहुंचने के बाद नागरिकों को सिटी मजिस्ट्रेट से मिलवाया गया जहां नागरिकों ने एक हस्ताक्षरित पत्र सौंपकर सीटीएम से पूछा की कोविड वैक्सीनेशन अनिवार्य है या ऐच्छिक है क्योंकि भारत सरकार की स्वास्थ्य मंत्रालय की वेबसाइट पर स्पष्ट तौर से कॉविड वैक्सीनेशन को ऐच्छिक यानी वॉलंटरी दर्शाया गया है इसी प्रकार वैक्सीनेशन बनाने वाली हर कंपनी इसे ट्रायल वैक्सीन बता रही हैं इसके अलावा भारत सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को कुछ दिन पहले ही एक एफिडेविट सौंपकर बताया है की कोविड वैक्सीनेशन अनिवार्य नहीं है, ऐच्छिक है तथा किसी भी कार्य के लिए वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य नहीं है।
दूसरी तरफ जिला प्रशासन समाज के हर वर्ग को अलग-अलग तरीके से दबाव बनाकर वैक्सीन के लिए मजबूर कर रहा है हर रोज स्कूलों में बच्चों पर वैक्सीनेशन के लिए दबाव बनाया जा रहा है। इसी प्रकार हर सरकारी कार्यालय यहां तक कि रेलवे स्टेशन पर भी बिना वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट दिखाएं प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालात यहां तक है कि स्कूलों में वैक्सिनेशन कैंप लगाकर बिना अभिभावकों की सहमति के मासूम बच्चों को वैक्सीन तक लगाई जा रही हैं।

इस पर सीटीएम कोई भी जवाब नहीं दे पाई। उन्होंने कहा की यह मामला जिलाधीश के संज्ञान में ला दिया जाएगा। नागरिकों ने सीटीएम से कहा कि आप जिलाधीश को फोन कर लीजिए तो इस पर भी उन्होंने जिलाधीश को पत्र सौंपने की बात ही कही सीटीएम से नागरिकों ने यह भी कहा की आप अपने कार्यालय में कोविड सर्टिफिकेट दिखाए बिना प्रवेश पर प्रतिबंध किस आधार पर लगाती हैं तो इस पर भी उनके पास कोई जवाब नहीं था। इसके अतिरिक्त सीटीएम से जब यह पूछा गया कि आप कब तक जिलाधीश से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण ले लेंगे तो इस पर भी उन्होंने कोई समय नहीं बताया। नागरिकों ने अंत में सीटीएम को कहा कि हम लोग आपसे आज शाम को फोन करके पूछेंगे कि हमारे पत्र पर प्रशासन का क्या जवाब है। यदि हमें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता है तो हम लोग इस शांतिपूर्वक कार्यक्रम को आंदोलन में बदलने के लिए बाध्य होंगे।

जिला प्रशासन से जवाब तलब करने वालों में ललित भाटिया,चरण जीत, राजीव सरदाना, अनिल सैनी, जगदीश राय, राधा सहगल, सुमन जाखड़, उदय चे, प्रशांत, अनु सुरा ढींगड़ा, आशीष जैन, हितेष बुधिराजा, मंजीत सिंह रोपरिया, सहित अनेक शहरवासी शामिल थे।