सरकार ने एमएसपी पर प्रस्तावित समिति के बारे में एसकेएम के सवालों को टाला

सरकार ने एमएसपी पर प्रस्तावित समिति के बारे में एसकेएम के सवालों को टाला

 रवि पथ न्यूज़ :

एसकेएम ने तब तक समिति के लिए नाम देने से मना किया है जब तक यह स्पष्ट नहीं हो जाता कि इस कमेटी में कौन होंगे, यह क्या करेगी और कैसे काम करेगी

एसकेएम 9 दिसंबर के आश्वासन पत्र में उल्लिखित समिति के गठन पर भारत सरकार के साथ अपने नवीनतम आदान-प्रदान को सार्वजनिक करना चाहता है।

जैसा कि सर्वविदित है, सरकार ने दिसंबर के महीने से इस समिति के गठन के लिए कोई कदम नहीं उठाया। एसकेएम ने सरकार के वादों को पूरा न करने के विरोध में 31 जनवरी को विश्वासघात दिवस मनाया। उसके बाद सरकार ने अपनी निष्क्रियता का बचाव करने के लिए आचार संहिता का बहाना दिया, हालांकि चुनावी आचार संहिता ऐसे पूर्व-घोषित निर्णय के कार्यान्वयन पर रोक नहीं लगाती है।

आखिर 22 मार्च को, एसकेएम समन्वय समिति के सदस्य  युद्धवीर सिंह को कृषि सचिव  संजय अग्रवाल का फोन आया, जिसमें भारत सरकार द्वारा गठित समिति के लिए एसकेएम से दो से तीन नामों को आमंत्रित किया गया।

इस मौखिक संदेश से यह कुछ स्पष्ट नहीं हुआ कि इस समिति में और किन्हें शामिल किया जाएगा इसका काम (मैंडेट) और कार्यकाल क्या होगा और यह कैसे काम करेगी।

एसकेएम ने 24 मार्च को श्री संजय अग्रवाल को ईमेल ( 25 मार्च को दोपहर 12:08 बजे) में निम्नलिखित स्पष्टीकरण का अनुरोध किया:

1. इस समिति का टीओआर (Terms of Reference) क्या होगा?
2. संयुक्त किसान मोर्चा के अलावा और कौन से संगठन, व्यक्ति और पदाधिकारी इस समिति में शामिल होंगे?
3. समिति का अध्यक्ष कौन होगा और इसकी कार्यप्रणाली क्या होगी?
4. समिति को अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए कितना समय मिलेगा?
5. क्या समिति की सिफारिश सरकार के लिए बाध्यकारी होगी?

यह ईमेल 30 मार्च को पुनः भेजी गई। लेकिन, आज तक कोई जवाब नहीं मिला है।

एसकेएम उम्मीद करता है कि समिति का गठन स्पष्ट और सहमत शर्तों पर किया जाना चाहिए। एसकेएम एक बार फिर सरकार से समिति के विवरण पर स्पष्टीकरण की मांग करता है। जब तक हम इस समिति के स्वरूप और कार्यसूची से पूरी तरह अवगत नहीं होंगे, तब तक ऐसी किसी समिति में भाग लेना सार्थक नहीं होगा।