प्रधानमंत्री की तथाकथित सुरक्षा चूक, केवल चुनावी स्टंट-एडवोकेट खोवाल

प्रधानमंत्री की तथाकथित सुरक्षा चूक, केवल चुनावी स्टंट-एडवोकेट खोवाल

नोटबंदी व पुलवामा अटैक के बाद भी ऐसे ही भुनाया गया था माहौल

कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन को भी बनाया था मखौल

हिसार, 07 जनवरी  रवि पथ :

हरियाणा कांग्रेस लीगल डिपार्टमेंट के प्रदेश चेयरमैन एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने गत दिवस पंजाब यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तथाकथित सुरक्षा चूक पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे मात्र एक प्रायोजित इवेंट करार दिया है। एडवोकेट खोवाल ने कहा कि इस घटनाक्रम के बाद जिस तरह से भाजपा नेता महामृत्युंजय यज्ञ करने का दिखावा कर रहे हैं, उससे कहीं न कहीं यह सुरक्षा चूक केवल पूर्व की चुनावी हथकंडा साबित हो रहा है।
एडवोकेट खोवाल ने कहा कि अभी तक प्रधानमंत्री का ट्रैक रिकार्ड रहा है कि वे खुद को मुद्दा बना देते हैं। नोटबंदी के दौरान जब जनता भूखे मर रही थी तो प्रधानमंत्री ने पहले विदेश में मजाक उड़ाया, लेकिन भारत आकर रोने लगे। इसी तरह पुलवामा अटैक के बाद कार्रवाई के नाम पर किए गए इवेंट को चुनावों में भुनाया गया था। यहां तक की कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन में कभी ताली तो कभी थाली बजाकर लोगों का ध्यान असल मुद्दे से भटकाने की कोशिश की गई थी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ है इसलिए सवालों का जवाब गंभीरता से दिया जाना चाहिए।
एडवोकेट खोवाल ने कहा कि जहां तक हालिया घटना की बात है, बठिंडा एयरपोर्ट से हुसैनीवाला के राष्ट्रीय शहीद स्मारक तक की दूरी 111 से लेकर 140 किलोमीटर बताई जा रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगर सड़क मार्ग से गए हैं तो वापसी का भी अंदाज़ा होगा, क्योंकि उस दिन मौसम तो दिन भर खराब रहा है। भारत के प्रधानमंत्री ने कब इतनी लंबी सड़क यात्रा की है, याद नहीं है। दो घंटे तक सफर करना और वापस तक इतने लंबे हाइवे को सुरक्षा से लैस रखना आसान काम नहीं है। यह तभी हो सकता है जब पहले से सब कुछ तय हो। उस दिन या कुछ घंटे के अंतराल पर केवल आपात स्थिति में किया जा सकता है मगर सामान्य रुप से नहीं। पंजाब में मौसम खराब था, इसका पता दिल्ली से बठिंडा उडऩे से पहले ही हो गया होगा। क्या तभी दौरा नहीं टाल देना चाहिए था। प्रधानमंत्री कार्यालय को जवाब देना चाहिए कि कब यह तय हुआ कि सड़क मार्ग से हुसैनीवाला जाना है। जबकि खुद प्रधानमंत्री ने 5 जनवरी की सुबह ट्वीट किया था, जिसमें हुसैनीवाला जाने का कार्यक्रम नहीं था।
एडवोकेट खोवाल ने कहा कि इस घटना के बाद संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान जारी किया है कि वहां के प्रदर्शनकारी किसानों को इसकी पुख्ता सूचना नहीं थी कि प्रधानमंत्री का काफिला वहां से गुजरने वाला है। उन्हे तो प्रधानमंत्री के वापस जाने के बाद मीडिया से पता चला। संयुक्त मोर्चा ने यह भी कहा कि काफिले के नज़दीक प्रदर्शनकारी नहीं गए थे। मगर बीजेपी के समर्थक बीजेपी का झंडा लेकर कैसे चले गए। उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद समाचार एजेंसी एएनआई के हवाले से एक खबर आती है कि अपने सीएम को थैक्स कहना, मैं बठिंडा जिंदा लौट आया। एएनआई के अनुसार प्रधानमंत्री ने यह बात एयरपोर्ट पर अधिकारियों से कही है। लेकिन किसी ने पता लगाने का प्रयास किया कि किन अधिकारियों से यह बात कही। इस लाइन से भावनाओं में उबाल लाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन यह साफ नहीं कि प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट पर किन अधिकारियों से बात की। उन अधिकारियों ने क्या पंजाब के मुख्यमंत्री को बताया कि प्रधानमंत्री का ऐसा संदेश है। अगर इसका जवाब नहीं आता है तो यह माना जाना चाहिए कि एएनआई की यह सूचना संदेहों से परे नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अब देश की जनता सच्चाई को जान चुकी है और उसे पता है कि यह सब आगामी पांच राज्यों के चुनावों के मध्यनजर किया जा रहा है। इसलिए अब कोई बहकावे में नहीं आएगा और आगामी विधानसभा चुनावों में उक्त राज्यों का जनादेश इसकी पोल पट्टी खोल कर रख देगा।