गुरूकुल शिक्षा पद्वति से ही समाज का हो सकता है सुधार- गंगवा

गुरूकुल शिक्षा पद्वति से ही समाज का हो सकता है सुधार- गंगवा

गुरूकुल आर्यनगर का वार्षिकोत्सव संपन्न

हिसार, 25 दिसंबर  रवि पथ :

गुरूकुल आर्य नगर के 57 वें वार्षिक महोत्सव का रविवार को समापन हुआ। समापन समारोह में मुख्य अतिथि रणबीर गंगवा विधायक नलवा ने शिरकत की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि गुरूकुल शिक्षा पद्धति से ही समाज का सुधार हो सकता है। गुरूकुल शिक्षा पद्धति से ही व्यक्ति घर समाज तथा देश का कल्याण कर सकता है। गुरूकुल में पढने वाले छात्र शिक्षा ग्रहण करने के बाद देश सेवा में विशेष योगदान देते हैं। इसके अलावा पुराने जमाने में भी गुरूकुलों का विशेष महत्व होता था। गंगवा ने कहा कि जब भी वे गुरूकुल आते हैं तो उन्हें एक अलग से ही खुशी का अनुभव होता है। वे इस गुरूकुल से हमेशा के लिए जुड़े रहना चाहते है। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पलाराम प्रमुख समाज सेवी सोनीपत ने की तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में राजेंद्र गावडिय़ा, चंद्रा राम गुरी, वेद प्रकाश आर्य, एसडीओ, तिलक राज जैन रहे।
कार्यक्रम के दौरान सुबह की बैठक में हरि सिंह सैनी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की, वहीं नरेंद्र मिगलानी विशिष्ट अतिथि तथा सांसद स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। गुरूकुल के मंत्री लाल बहादुर खोवाल व कार्यकारी प्रधान रामकुमार आर्य ने आए अतिथियों का अभिनंदन किया। एडवोकेट खोवाल ने कहा कि गुरूकुल जैसी संस्थाएं लोगों के सहयोग से ही चलती है। उन्होंने गुरूकुल को अनुदान देने वाले महानुभावों का आभार व्यक्त किया और उन्हें विश्वास दिलाया कि गुरूकुल आर्यनगर पूर्व की भांति इसी तरह समाज के विकास में अपना योगदान देता रहेगा। इस दौरान गुरूकुल के मानद कुलपति आचार्य रामस्वरूप शास्त्री को 1964 से यानि स्थापना से लगातार की गई सेवाओं को देखते हुए गुरुकुल की तरफ से उन्हें सम्मानित किया गया। वहीं मंत्री लाल बहादुर खोवाल, कार्यकारी प्रधान रामकुमार आर्य, मुख्य अधिष्ठाता मानसिंह पाठक, प्रबंधक सुरेश शास्त्री आदि ने आए मेहमानों को शॉल, गायत्री पट व चित्र भेंट कर सम्मानित किया।
आज दूसरे देशों में भी बताई जा रही है यज्ञ की महिमा
गुरूकुल के प्रधान स्वामी सुमेधानंद सरस्वती ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि महर्षि स्वामी दयानंद सरस्वती की बात आज भारत देश के अलावा दूसरे देशों में भी बताई जा रही है कि यज्ञ की क्या महिमा होती है। गुरूकुल के प्रधान स्वामी सुमेधानंद सरस्वती सांसद सीकर ने कहा कि उन्होंने बहुत से देशों की यात्राएं की है, जहां पर आज यज्ञ को बहुत महत्व दिया जा रहा है। भारतीय संस्कृति की रक्षा में गुरूकुलों का विशेष योगदान है। हमारी संस्कृति, संस्कृत गुरूकुलों के बिना अधूरी है। आधुनिक भारत में गुरूकुल परंपरा ज्यादा जरूरी है। वर्तमान समय में जहां समाज में कुरीतियां बढ़ती जा रही हैं। उन्होंने गुरूकुल पद्वति पर अपने विचार रखते हुए कहा कि हम सभी को गुरुकुलों के विकास एवं समवर्धन के लिए प्रयास करना चाहिए।
आध्यात्मिक जीवन का दिया संदेश
कार्यक्रम में स्वामी सदानंद सरस्वती, स्वामी आदित्यवेश सरस्वती व धर्मदेव आदि ने भी आध्यात्मिक जीवन के बारे में संदेश दिया। वहीं पूर्व स्नातकों ने भी सामूहिक सहयोग के लिए गुरूकुल के कल्याण के बारे में विस्तार से चर्चा करते हुए पूर्ण सहयोग देने की बात कही। कल्याणी आर्य ने भी मधुर भजनों से सभा में अध्यात्मिक समा बांधी। मंच संचालन देवदत्त शास्त्री तथा जगतपाल शास्त्री ने किया। इस अवसर पर गुरूकुल के कार्यकारी प्रधान रामकुमार आर्य, मंत्री लाल बहादुर खोवाल, मुख्य अधिष्ठाता मानसिंह पाठक, बार एसोसिएशन के प्रधान अनेंद्र लौरा, अजय बत्रा, सतवीर वर्मा, सुभाष जांगड़ा, प्रबंधक सुरेश शास्त्री, कर्नल ओम प्रकाश, डॉ एसके गुलाटी, चंद्रदेव शास्त्री,बलवान शास्त्री, प्राचार्य जोगिंदर सिंह, राकेश शास्त्री, रामफल वर्मा, रामनिवास वर्मा , डॉ कौशल वर्मा, महेंद्र आर्य, सीताराम आर्य, दीप कुमार आर्य, सुनील शास्त्री, राजबीर सिवाच, मुकेश कुमार, शिशुपाल शास्त्री, राहुल आर्य, फकीर चंद आर्य नगर सहित अनेक स्नातक तथा मातृशक्ति सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।