गुरू व गुरूकुलीय शिक्षा पद्वति का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान- इंद्रदेव शास्त्री

गुरू व गुरूकुलीय शिक्षा पद्वति का जीवन में महत्वपूर्ण स्थान- इंद्रदेव शास्त्री

गुरूकुल आर्यनगर संस्कृत विद्यापीठ का 57वां वार्षिक महोत्सव का शुभारंभ

हिसार, 22 दिसंबर  रवि पथ  :

गुरूकुल आर्यनगर संस्कृत विद्यापीठ हिसार के 57वें वार्षिक महोत्सव का बुधवार से विधिवत रूप से यज्ञ के साथ शुभारंभ हुआ। चार दिवसीय इस कार्यक्रम के पहले दिन यज्ञ के ब्रह्मा इंद्रदेव शास्त्री ने कहा कि ज्ञान और विद्या की प्राप्ति के लिए अच्छे गुरू और गुरूकुलीय शिक्षा पद्वति का जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान है। उन्होंने इसी विषय पर गुरूकुल के ब्रह्मचारियों व यज्ञ के यजमानों को बड़े ही सुंदर और रोचक ढंग से व्याख्यान देते हुए कहा कि स्वामी श्रद्धानंद जी सरस्वती ने गुरूकुलीय शिक्षा को बढ़ावा देने की शुरूआत की थी। उसी परंपरा को गुरूकुल आर्यनगर की स्थापना भी स्वामी देवानंद जी महाराज ने की तथा पूज्य आचार्य पंडित रामस्वरूप शास्त्री के श्रीचरणों में बैठकर शिक्षा ग्रहण करने का सुअवसर प्राप्त हुआ व अनेकों शिष्य आज देश के कोने कोने में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। गुरूकुल के मंत्री एडवोकेट लाल बहादुर खोवाल ने बताया कि 25 दिसंबर को यह कार्यक्रम विशेष उत्सव के रूप में मनाया जाएगा। इस मौके पर कार्यकारी प्रधान रामकुमार आर्य, मंत्री लाल बहादुर खोवाल, कर्नल ओमप्रकाश, देवदत्त शास्त्री, रमेश, प्रबंधक सुरेश कुमार, दीपकुमार, महाधिष्ठाता मानसिंह पाठक व यज्ञमान महाबीर सिंह सेवानिवृत तहसीलदार, महेंद्र, सीताराम आर्य, भारत व भजनोपदेशिका कल्याणी आर्या ने मधुर भजन प्रस्तुत किए व गुरूकुल के ब्रह्मचार व सभी सदस्य विशेष तौर पर उपस्थित रहे।