हांसी जल सेवाएं मंडल के विभिन्न गावों में 16 करोड़ रुपये की राशि से किए जाएंगे बाढ़-बचाव प्रबंध : उपायुक्त

हांसी जल सेवाएं मंडल के विभिन्न गावों में 16 करोड़ रुपये की राशि से किए जाएंगे बाढ़-बचाव प्रबंध : उपायुक्त

हांसी, 08 जुलाई  रवि पथ :

उपायुक्त डॉ प्रियंका सोनी ने कहा कि हांसी जल सेवाएं मंडल के अंतर्गत आने वाले गावों में 15 करोड़ 95 लाख 43 हजार रुपए की राशि से बाढ़ बचाव प्रबंधों के दृष्टिगत विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य जारी हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर मंडल के अंतर्गत आने वाले गावों में जल-भराव की वर्षों पुरानी समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि सिंचाई विभाग द्वारा हांसी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गांव पु_ी, सिंघवा खास, मदनहेड़ी, खरकड़ा तथा भाटोल जाटान में भूमिगत जल स्तर को नीचे लाने के दृष्टिगत 325.52 लाख रुपए की लागत से सबमर्सिबल पंप एवं पाइप लाइन बिछाने का कार्य प्रगति पर है। इस परियोजना के तहत 70 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है तथा शेष कार्य को एक सप्ताह में पूरा करवा दिया जाएगा। इस परियोजना के पूरा होने के पश्चात विभिन्न गावों के लोगों को जलभराव के कारण होने वाली समस्या का स्थाई समाधान हो जाएगा।
इसी प्रकार से गांव गढ़ी, अनीपुरा व रामपुरा में बरसाती पानी की निकासी का समुचित प्रबंध करने के लिए 165.46 लाख रुपए का बजट अलॉट किया गया है। विभाग द्वारा शीघ्र ही कार्य शुरू करवा दिया जाएगा तथा इस कार्य के पूरा होने के पश्चात गांव रामपुरा व गढ़ी की लगभग 4 हजार एकड़ भूमि पर जलभराव की निकासी का स्थाई समाधान हो जाएगा।

विभाग द्वारा विभिन्न 27 ड्रेनों के 87 फील्ड पाथ को हटाकर उसकी जगह स्लैब कलवर्ट में तब्दील करने के लिए 237.57 लाख रुपए की राशि स्वीकृत की गई है। इस कार्य के लिए विभाग द्वारा टेंडर करवाया जा चुका है तथा टेंडर के रेट भी पास हो चुके हैं। शीघ्र ही कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। गांव गढ़ी, भाटोल जाटान व सोरखी में बरसाती पानी के कारण लगभग 6 हजार एकड़ भूमि से जल निकासी करवाने के लिए 830.88 लाख रुपए की धनराशि स्वीकृत की गई है। किसानों के समक्ष आने वाली बरसाती पानी की समस्या का स्थाई समाधान करने में यह परियोजना एक मील का पत्थर सिद्ध होगी।
उपायुक्त ने बताया कि सिंचाई विभाग के अधिकारियों को उक्त परियोजना के अंतर्गत किए जाने वाले सभी कार्यों को निर्धारित समयावधि में पूरा करवाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों के समक्ष आने वाली विभिन्न समस्याओं का स्थाई समाधान सुनिश्चित किया जा सके।