आखिर किसने भेजा पुलिस विभाग की जमीन की पैमाइश बाबत बिना पदनाम और बिना मोहर वाला नोटिस

आखिर किसने भेजा पुलिस विभाग की जमीन की पैमाइश बाबत बिना पदनाम और बिना मोहर वाला नोटिस

ना तो राजस्व विभाग और ना ही नगर परिषद के अधिकारी को जानकारी

नोटिस पर केवल हस्ताक्षर और पैन से अंकित है तिथि सहित डायरी नंबर

नारनौल  रवि पथ :

करीब डेढ़ माह पहले नारनौल की पुरानी कचहरी में पानी की टंकी के पास स्थित जमीन पर कब्जा कार्रवाई को लेकर सुर्खियों में आई जमीन एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। 27 मई को इस जमीन पर पुलिस विभाग अपनी बताकर इस पर कब्ज लेने गया था लेकिन कागजों के अभाव के चलते पुलिस को खाली हाथ बैरंग लौटना पड़ा था। इस बार पुलिस विभाग की इस जमीन की पैमाइश को लेकर दो दिन पहले भेजे गये एक अजीब नोटिस के कारण यह मामला चर्चा में आ गया है। इस नोटिस पर ना तो किसी विभाग के अधिकारी का नाम, ना कोई पद और ना ही किसी विभाग की राइटिंग पैड है। नोटिस केवल साधारण कागज पर कंप्यूटर से टाइप करके उस पर तिथि और क्रमांक नंबर पैन से लिखकर नीचे हाथ से अस्पष्टï हस्ताक्षर करके जारी किया गया है। यह नोटिस जितेंद्र पुत्र किशोरी लाल व सत्यनारायण पुत्र किशोरी लाल के नाम 6 जुलाई को जारी किए गए हैं। इस बाबत जितेंद्र के पुत्र राजेश एडवोकेट ने पुष्टिï करते हुए बताया कि उन्हें 6 जुलाई की शाम साढ़े पांच बजे एक व्यक्ति ने आकर कहा कि वह नगर परिषद नारनौल कार्यालय से आया है और 8 जुलाई को सुबह दस बजे नोटिस में अंकित जमीन की निशानदेही होनी है, इसलिए नोटिस रिसीव करके पावती दे।
जितेंद्र और सत्यनारायण को दिए गए बिना पदनाम, बिना मोहर वाले नोटिस में लिखा है कि पुराने कार्यालय पुलिस अधीक्षक नारनौल पुरानी कचहरी में पुलिस विभाग महेंद्रगढ के नाम पर भूमि है। जिसका खसरा टाउन 5205 है। अत: इस बाबत सूचित किया जाता है कि इस भूमि की पैमाइश-निशानदेही 08 जुलाई को सुबह 10 बजे की जानी है, आप मौका स्थल पर निश्चित तिथि व समय पर हाजिर होवे।
राजेश एडवोकेट ने बताया कि बिना किसी अधिकारी के पदनाम और बिना मोहर वाले नोटिस को देखकर वे खुद भी हैरान हुए लेकिन आने वाले कर्मचारी ने खुद को नगर परिषद से बताया था तो उन्होंने इस बाबत नगर परिषद के प्रशासक नारनौल एसडीएम के नाम उनके कार्यालय में विस्तार से जानकारी वाला एक पत्र पहुंचा दिया। एसडीएम कम प्रशासक को लिखे इस पत्र में नोटिसधारियों ने कहा है कि जिस जगह को लेकर उन्हें नोटिस दिया गया है उस भूमि पर वे अदालत के आदेशों पर डयूटी मजिस्टे्रट द्वारा काबिज है। फिलहाल इस जमीन को लेकर उनका मामला हाईकोर्ट में लंबित है और पुलिस विभाग प्रतिवादी है। एसडीएम को लिखे पत्र में नोटिसधारियों ने कहा है कि मामला हाईकोर्ट में लंबित होने के कारण इस जमीन की किसी भी प्रकार की पैमाइश बिना अदालत के आदेशों के करना अदालत की अवमानना की श्रेणी में माना जाएगा, इसलिए इस जमीन की किसी भी प्रकार की निशानदेही या पैमाइश बिना किसी अदालती आदेशों के ना की जाये।


नोटिसधारी उपरोक्त जवाब देकर आज 8 जुलाई को सुबह से ही मौके पर उपस्थित रहे लेकिन शाम पांच बजे तक भी कोई भी व्यक्ति पैमाइश के लिए मौके पर नहीं आया। जिसको लेकर यह जमीन पर फिर चर्चा में आ गई है कि आखिर जितेंद्र और सत्यनारायण को यह नोटिस किस कार्यालय से जारी हुए हैं।

नगर परिषद ने नहीं भेजा कोई नोटिस: अभय सिंह
इस मामले में नारनौल नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अभय सिंह यादव से बात की गई तो उन्होंने साफ इंकार करते हुए कहा कि उनके या उनके कार्यालय द्वारा जितेंद्र और सत्यानारायण किसी भी जमीन की पैमाइश के कोई नोटिस नहीं भेजे गए हैं। जब उनसे कहा गया कि नोटिस देने गए कर्मी ने खुद को नगर परिषद का कर्मचारी बताया था तो उनका जवाब था कि हो सकता हो कि नोटिस राजस्व विभाग से आये हो और उनके कर्मचारी के माध्यम से सर्व करवाने के लिए भेज दिए गए हो। दूसरी तरफ राजस्व विभाग कार्यालय से बातचीत की गई तो वहां से संबंधित कर्मचारी और अधिकारी ने बताया कि राजस्व विभाग द्वारा पुरानी कचहरी के पास किसी भी जमीन की पैमाइश के कोई नोटिस जारी नहीं किए गए हैं। अब सवाल यह है कि आखिर अब इस तरह के नोटिस लोगों को जारी करके नारनौल के अधिकारी आम जनता में क्या संदेश देना चाह रहे हैं। इधर राजेश एडवोकेट ने कहा कि साधारण कागज पर कंप्यूटराइज नोटिस पर किए गए हस्ताक्षर के आधार पर नोटिस जारी करने वाले का पता लगाया जाएगा और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।