विधायक बलराज कुंडू ने महम हल्के में जरूरतमंद लोगों को मुफ्त दवाईयाँ बांटने का छेड़ा अभियान

विधायक बलराज कुंडू ने महम हल्के में जरूरतमंद लोगों को मुफ्त दवाईयाँ बांटने का छेड़ा अभियान

गांवों के लोगों की जीवन रक्षा के लिए कुंडू ने मंगवाई 20 लाख की दवाईयाँ

खेड़ी महम स्थित धर्मार्थ अस्पताल में दान की 5 लाख की दवाईयाँ और ऑक्सीजन कन्संट्रेटर

कुंडू की सरकार को नसीहत-उद्धघाटन इवेंट छोड़कर कोरोना महामारी की दुःख की घड़ी में लोगों बचाने पर फोकस करें मुख्यमंत्री

महम, 17 मई   रवि पथ :

निर्दलीय विधायक बलराज कुंडू ने कोरोना महामारी से लोगों को बचाने के लिए महम हल्के में मुफ्त दवाईयाँ बाँटने का अभियान शुरू किया है। उन्होंने आज खेड़ी महम स्थित धर्मार्थ अस्पताल में आक्सीजन कन्संट्रेटर और 5 लाख की दवाईयाँ दान देकर इस अभियान की शुरुआत कर दी है। बता दें कि डॉक्टर लाम्बा के बीमार होने और दवाओं के अभाव में खेड़ी महम अस्पताल कई दिन से बन्द था और अब इसके चालू होने से आसपास के गांवों के हजारों लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब तक डॉक्टर लाम्बा स्वस्थ नहीं होते किसी दूसरे डॉक्टर को हायर किया जाए जिसकी तनख्वाह का सारा खर्च कुंडू खुद उठाएंगे क्योंकि महम हल्के के लोगों के लिए इस अस्पताल का चालू रहना बहुत जरूरी है।
बलराज कुंडू ने कहा कि आज प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में ना दवाईयाँ हैं, ना बेड और ना आक्सीजन मिल रही है, जिससे लोगों का बुरा हाल है।

इसी बात को देखते हुए उन्होंने खुद ही 20 लाख रुपये की दवाईयाँ मंगवाई हैं, जिनमें बुखार, खांसी, सिर दर्द समेत इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक विटामिन सी एवं जिंक आदि की सभी जरूरी टेबलेट के अलावा मास्क भी शामिल हैं। इन दवाईयों के पैकेट बनवाकर हल्के के सभी गांवों के जरूरतमंद गरीब एवं बीमार लोगों में बांटे जाएंगे ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को घर बैठे फ्री में दवाईयाँ मिल सकें और वे अपने और अपने परिवारजनों को स्वस्थ एवं सुरक्षित रख सकें।
उन्होंने प्रदेश सरकार को भी नसीहत दी कि वह महामारी के इस दौर में इवेंटबाजी छोड़कर प्रदेश के लोगों को कोरोना से बचाने पर ताकत लगाए ना कि हिसार की तरह किसानों पर बर्बरता पूर्वक लाठियां भांजकर माहौल बिगाड़ें। कुंडू बोले, दुःख की घड़ी में अस्थाई अस्पतालों जैसे उद्धघाटन समारोह आयोजित कर वाहवाही लूटने की बजाय मुख्यमंत्री को केंद्र सरकार पर दबाव बनाकर किसानों की मांगें मनवानी चाहियें। मुख्यमंत्री के हिसार आगमन पर जो टकराव हुआ और जिस तरह से निहत्थे अन्नदाताओं पर बर्बरता से लाठियां भांजी गयी वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।