ऐतिहासिक सत्र, प्रत्येक विधायक को दिया बोलने का मौका

ऐतिहासिक सत्र, प्रत्येक विधायक को दिया बोलने का मौका

81 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव मिले, 21 बने कार्यवाही का हिस्सा

सरकार ने दिए 388 प्रश्नों के जवाब, 15 विधेयक पास

गुप्ता ने सत्ता पक्ष और विपक्ष का आभार जताया

चंडीगढ़, 23 मार्च रवि पथ :

हरियाणा की 14वीं विधान सभा के तीसरे बजट सत्र ने नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए हैं। 90 सदस्यों वाली विधान सभा में एक भी विधायक ऐसा नहीं जो यह कह सके कि उसे बोलने का अवसर नहीं दिया गया। विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने प्रदेश के सभी 90 हलकों की बात सदन में रखनी सुनिश्चित कर इतिहास रच दिया। आंकड़ों की दृष्टि से भी यह सत्र विशिष्ट रहा। विधान सभा के इतिहास में पहली बार 81 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्राप्त हुए। इनमें से 21 पर सदन में चर्चा हुई। कुल 50 घंटे चली कार्यवाही के दौरान 15 विधेयक पारित किए गए। 160 तारांकित और 228 अतारांकित प्रश्नों के जवाब सरकार की ओर से दिए। विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने बुधवार को एमएलए हॉस्टल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सत्र की कार्यवाही का ब्योरा मीडिया के साथ साझा किया।

विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने सत्र की शुरुआत में अभिभाषण के लिए राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय और बजट अभिभाषण के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल का आभार व्यक्त किया है। गुप्ता ने कहा के अनुसार दोनों विशिष्ट हस्तियों की प्रस्तुतियों से सदन की गरिमा बढ़ी है। सदन ने दोनों ही अभिभाषणों को गंभीरता से लेते हुए इन पर व्यापक चर्चा की है। इस मौके पर उन्होंने सत्र सुचारू रूप से चलाने के लिए सत्तापक्ष के साथ-साथ विपक्ष का भी आभार व्यक्त किया। गुप्ता ने कहा कि सत्र को कामयाब बनाने में अधिकारीगण और मीडिया की भूमिका भी सराहनीय रही।

ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि बजट सत्र के पहले दिन सदन में गन्नौर से विधायक निर्मल रानी और फरीदाबाद (एनआईटी) से विधायक नीरज शर्मा को सर्वश्रेष्ठ विधायक के तौर पर सम्मानित किया गया। उन्होंने दूसरे विधायकों से भी अपील की कि वे कमेटियों और सदन की कार्यवाही में सकारात्मक और रचनात्मक सहयोग देकर लोकतंत्र के प्रति अपनी दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करें।

गुप्ता ने कहा कि बजट सत्र के लिए विधान सभा को कुल 18 विधेयक प्राप्त हुए थे। इनमें से 2 को प्रवर समिति को भेजा, जबकि एक विधेयक सरकार ने वापस ले लिया। इस प्रकार व्यापक चर्चा के बाद 15 विधेयक सदन ने पारित किए।

2 मार्च से 22 मार्च तक हुई कुल 12 बैठकों में 49 घंटे 57 मिनट कार्यवाही चली। इसके अलावा 4 दिन का सत्रावकाश भी रहा, जिसमें सभी 74 विधायकों की 8 कमेटियों ने बजट का अध्ययन किया। करीब 50 घंटे की कार्यवाही में 8 घंटे 40 मिनट राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा हुई, जिसमें से मुख्यमंत्री के विस्तृत जवाब सहित भाजपा को 4 घंटे 44 मिनट का समय दिया। इस दौरान भाजपा के 20 विधायकों ने अपनी बात रखी। जेजेपी को 1 घंटा 4 मिनट का समय मिला, जिसमें उसके 5 विधायकों को बोलने का अवसर मिला। कांग्रेस को 2 घंटे 14 मिनट मिले, जिसमें पार्टी के 15 विधायकों ने बात रखी। इनेलो के एकमात्र विधायक को 12 मिनट मिले। इस दौरान 26 मिनट तक 3 निर्दलीय विधायक भी बोले।

सत्र की 5 बैठकें बजट पर चर्चा को समर्पित रही। विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने कुल 10 घंटे 26 मिनट तक यह चर्चा जारी रखी। इस चर्चा में भाजपा को 5 घंटे 4 मिनट, जजपा को 41 मिनट, कांग्रेस को 3 घंटे 49 मिनट, इनेलो को 11 मिनट और निर्दलीय विधायकों को 41 मिनट मिले। इस सभी दलों के क्रमश: 20, 4, 19, 1 और 5 विधायकों को बोलने का अवसर दिया गया। 4 मार्च को 51 मिनट का शून्यकाल रहा। इस दौरान भाजपा के 3, जजपा के 1, कांग्रेस के 5 विधायकों को बोलने का अवसर दिया गया।

विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने बताया कि विधान सभा सचिवालय को तारांकित प्रश्नों के लिए 500 नोटिस प्राप्त हुए थे। इनमें से 385 प्रश्न स्वीकृत किए गए। बजट सत्र की कुल 12 बैठकों में से 8 की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई और प्रत्येक दिन 20 और कुल मिलाकर 160 प्रश्न शामिल किए गए। इनमें से 101 प्रश्नों पर चर्चा हो सकी। इसी प्रकार 296 अतारांकित प्रश्नों के लिए नोटिस प्राप्त हुए थे, जिसमें से 231 स्वीकृत हुए। कुल अतारांकित 228 प्रश्नों के जवाब सदन पटल पर रखे गए।

विधान सभा सचिवालय को 5 स्थगन प्रस्ताव भी प्राप्त हुए थे, जिनमें से 2 को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में परिवर्तित कर दिया गया और 3 अस्वीकृत करने पड़े। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव 81 प्राप्त हुए थे, जिसमें से 21 कार्यवाही का हिस्सा बने। इन प्रस्तावों में से 6 पर सदन में गंभीर चर्चा हुई और समान प्रकृति के होने के कारण 15 प्रस्तावों को भी इनमें समायोजित किया गया। 60 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव अस्वीकृत किए गए। लघु अवधि चर्चा के लिए भी 3 प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें से एक पर 22 मार्च को चर्चा की गई। एक सरकारी प्रस्ताव (ऑफिशियल रिज्योलेशन) भी कार्यवाही का हिस्सा बना। इस पर 16 मार्च को हुई चर्चा में 13 विधायकों ने भाग लिया। सत्र के दूसरे दिन 3 मार्च को एक गैर सरकारी प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। 2 गैर सरकारी प्रस्ताव अस्वीकृत किए गए।