पराली खेत में मिलाकर धरती माता और पर्यावरण पिता का मान बढ़ाए

पराली खेत में मिलाकर धरती माता और पर्यावरण पिता का मान बढ़ाए

हिसार, 03 नवंबर रवि पथ :

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत कृषि विज्ञान केंद्र सदलपुर ने रामायण गाँव में 50 किसानों के लिए फसल अवशेष प्रबंधन को लेकर एक दिवसीय किसान प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया।
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से कृषि वैज्ञानिक अजीत सांगवान ने बताया कि धरती माता हमारा पालन पोषण करती है, हम खेत में पराली को आग लगाकर उसकी छाती में आग लगाने का काम करते हैं। इससे होने वाले धुएं से हमारे पर्यावरण रूपी पिता का मुंह काला होता है। हमें कई संकटों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया अक्टूबर व नवम्बर के महीने में पराली जलाने से होने वाले धुँए के साथ ओस की बूंदें मिलकर स्मॉग बना देते हैं। इसके साथ में दशहरे व दीपावली पर जले पटाखों के कारण जहरीली गैस पर्यावरण को दूषित करने के साथ ऑक्सीजन की कमी करती हैं, जिससे साँस लेने में तकलीफ के साथ आंखों में जलन होती है। स्मॉग के कारण सड़क पर दिखाई भी कम देता है, जिसके कारण वाहनों का एक्सीडेंट भी होता है।
पराली जलने से स्वास्थ्य, खेत व फसल में होने वाले नुकसान के बारे में किसानों को विस्तार से बताया गया। किसानों को यह भी बताया गया कि धान की कटाई के बाद मिट्टी पलट हल से जुताई से खेत की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है। इस मौके पर जीरो टिलेज मशीन, रोटावेटर के लाभ तथा उपयोग करने की विधि के बारे में भी अवगत करवाया गया। धान कटाई के बाद समय पर सुपर सीडर मशीन द्वारा फसल अवशेषों को खेत में मिलाकर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाने के संबंध में भी महत्वपूर्ण जानकारियां दी।
किसानों को यह भी बताया गया कि हेरक व स्ट्रॉ बेलर मशीनों द्वारा गांठ बनाकर आमदनी भी की जा सकती है। कृषि विज्ञान केंद्र के कोऑर्डिनेटर डॉ.नरेंद्र कुमार ने सरकार द्वारा किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं, मशीनों पर मिल रहे अनुदान, कृषि विभाग के किसान पोर्टल की जानकारी, कस्टम हायरिंग सेंटर के लिए आवश्यक दस्तावेजों के बारे में विस्तार से समझाया।