प्राकृतिक खेती से बदल सकती है देश के किसान की दशा व दिशा : राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय

प्राकृतिक खेती से बदल सकती है देश के किसान की दशा व दिशा : राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय

एचएयू में स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह की जयंती पर आयोजित किसान दिवस कार्यक्रम में बोले राज्यपाल

प्रगतिशील महिला किसानों को किया सम्मानित, गुरमैल सिंह को दिया किसान रत्न अवार्ड

हिसार 23 दिसंबर रवि पथ :

प्राकृतिक खेती से देश के किसान की दशा व दिशा बदल सकती है। इसके लिए किसान अधिक से अधिक प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दें क्योंकि इसकी राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार में बहुत ज्यादा डिमांड बढ़ रही है। ये विचार प्रदेश के राज्यपाल एवं चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलाधिपति श्री बंडारू दत्तात्रेय ने व्यक्त किए। वे विश्वविद्यालय में आयोजित किसान दिवस समारोह में बतौर मुख्यातिथि वैज्ञानिक-किसानों की उत्तम खेती-उन्नत किसान विषय पर संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज ने की। मुख्यातिथि ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह व स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय चरण सिंह का मानना था कि राष्ट्र की संपन्नता ग्रामीण क्षेत्र के उन्नयन मेें समाहित है। राष्ट्र तभी संपन्न हो सकता है जब ग्रामीण क्षेत्र का विकास हो और ग्रामीण लोगों की क्रय शक्ति अधिक हो। उन्होंने कहा कि कहा कि जिस दिन स्वर्गीय चौधरी चरण सिंह ने स्वतंत्र भारत के 5वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली तो उस दिन देश के किसानों, दलितों, पिछड़ों सभी में खुशी की लहर दौड़ गई थी क्योंकि उस दिन उन्हें सत्ता में उनकी भागीदारी का अहसास हुआ था जो उनका बहुत पुराना सपना था। इस दौरान विश्वविद्यालय द्वारा विकसित ई-टै्रक्टर के अलावा विश्वविद्यालय के एबिक से जुडक़र स्टार्टअप्स द्वारा लगाई गई विभिन्न प्रदर्शनियों का अवलोकन किया कर आधुनिक तकनीकों की जानकारी हासिल की। विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. रामनिवास ढांडा ने मुख्यातिथि का स्वागत किया और कार्यक्रम की जानकारी दी।
महिलाओं को निर्णय लेनी की जिम्मेदारी देने पर दिया जोर
माननीय राज्यपाल ने महिलाओं की सभागार में संख्या को देखते हुए उनकी जमकर सराहना की और इस बात पर जोर दिया कि उन्हें घर-परिवार व अन्य कृषि कार्यों के लिए निर्णय लेने की जिम्ममेदारी सौंपनी चाहिए। इससे एक ओर जहां महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा वहीं देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम में प्रदेश के सभी जिलों से भारी संख्या में महिला किसानों ने हिस्सा लिया जिसे देखकर मुख्यातिथि माननीय राज्यपाल ने खुशी जाहिर की।
स्वर्गीय अटल बिहारी जी ने किसानों को विज्ञान के साथ जोडऩे पर दिया बल
उन्होंने कहा कि आज से 2 दिन बाद 25 दिसंबर को देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय श्री अटल बिहारी वाजपायी जी की जयंती है। इस अवसर पर उन्हें भी अपनी ओर से नमन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। उन्होंने कहा कि उनके दिल में किसानों के प्रति बहुत ही आदर व स्नेह था और सदा किसानों के उत्थान के बारे में सोचते थे। उन्होंने किसानों को विज्ञान के साथ जोडऩे पर बल दिया और जय जवान, जय किसान के नारे को आगे बढ़ाते हुए जय विज्ञान का नारा दिया।
प्रदेश की 19 प्रगतिशील महिला किसानों को किया सम्मानित
प्रदेश की प्रगतिशील 19 महिला किसानों को सम्मानित करते हुए उन्होंने खुशी जाहिर की कि इस सभागार में महिला किसानों की बहुत अधिक संख्या काबिलेतारिफ है। आज महिलाएं कंधे से कंधा मिलाकर पुरूषों के साथ आगे बढ़ रही हैं। समाज को बदलने में इनकी अहम भूमिका है। भविष्य में भी महिलाएं यूं ही लगातार कृषि सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपना रूतबा कायम कर रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान रखता है विश्वविद्यालय : प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर बी.आर. काम्बोज ने कुलाधिपति का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने विभिन्न फसलों की उन्नत किस्मों को विकसित करके, आधुनिक तकनीकों को ईजाद करने सहित विभिन्न क्षेत्रों में अवार्ड हासिल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाई है। विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक, कर्मचारी व विद्यार्थी निरंतर मेहनत करते हुए नई ऊंचाईयों पर ले जा रहे हैं। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे अधिक से अधिक विश्वविद्यालय से जुडक़र लाभ उठाएं। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए स्वर्गीय चरण सिंह को सदैव याद किया जाएगा और यही कारण है कि उनके अतुलनीय योगदान का स्मरणीय बनाने के लिए हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार का नाम उनके नाम पर रखा गया है जो उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
ये भी रहे मौजूद
इस अवसर पर उपायुक्त डॉ. प्रियंका सोनी, डीआईजी बलवान सिंह राणा, कुलसचिव डॉ. एस.के. महत्ता, ओएसडी डॉ. अतुल ढींगड़ा सहित सभी महाविद्यालयों के अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, प्रदेश की महिला व पुरूष किसानों सहित विद्यार्थी व कर्मचारियों के अलावा प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।