पालिका व परिषदों के चेयरमैनों की सरकार को चेतावनी, मांगे नहीं मानी तो देंगे सामूहिक इस्तीफा

पालिका व परिषदों के चेयरमैनों की सरकार को चेतावनी, मांगे नहीं मानी तो देंगे सामूहिक इस्तीफा

नारनौल,  रवि पथ :

हरियाणा नगर पालिका एवं परिषदों के चेयरमैनों की यूनियन ने हरियाणा सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री ने उनकी मांगे नहीं मानी तो वे शीघ्र ही सामूहिक रूप से अपना इस्तीफा देंगे। नारनौल के तुलिप रिसोर्ट में आयोजित एक पत्रकार सम्मेलन में हरियाणा के विभिन्न जिलों की 15 नगर पालिका व परिषदों के चेयरमैनों व उनके प्रतिनिधियों ने सामूहिक रूप से यह चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अभी सरकार ने करीब दो महीने पहले प्रदेश की सभी पालिका व परिषदों में एक पत्र भेजकर लिखा है कि भविष्य में लोकल बॉडी के तमाम टेंडर मुख्यालय से ही फिक्स किए जांएगे। पालिका चेयरमैनों ने कहा कि सरकार का यह निर्णय पालिका व परिषदों के प्रधानों की पावर का हनन है तथा जनहित में नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर की लोकल समस्याओं का ज्ञान वहां के पार्षदों व चेयरमैनों को है ना कि चंडीगढ बैठे सरकार के अधिकारियों को है। चेयरमैनों ने कुछ उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले कुछ महीनों पहले प्रदेश भर में लोकल बॉडीज मुख्यालय द्वारा पालिका व परिषदों को रोड सफाई मशीन थोप दी गई है। यह मशीन सरकार में बैठे अधिकारियों ने चंडीगढ से टेंडर करके एक-एक करोड की खरीदी है और इसको चलाने के लिए मासिक खर्चा प्रति माह पौने पांच लाख रुपये पालिका व परिषदों को भुगतना पड़ रहा है और डीजल खर्च इसके अलावा लग रहा है। प्रधानों ने कहा कि यदि ये मशीने पालिका व परिषद अपने स्तर पर खरीदती तो काफी कम लागत में आ सकती थी और इसे वर्तमान पौने पांच लाख की बजाय महज एक लाख रूपये में चला सकती है।


गोहाना पालिका के चेयरपर्सन प्रतिनिधि ने कहा कि उनकी पालिका में सोलिड वैस्ट के  टेंडर में चंडीगढ से 947 रूपये प्रति मीट्रिक टन फिक्स किया था जबकि उन्होंने अपने स्तर पर इसे 625 रूपये में टेंडर लगाए हैं। इसी प्रकार अन्य बहुत से उदाहरण है जिसकी वजह से एक तरफ प्रधानों की पावर का हनन हुआ है और दूसरी तरफ सरकार को राजस्व का मोटा नुकसान हो रहा है। चेयरमैनों ने यह भी कहा कि कहने को वे शहर की सरकार है लेकिन सरकार के उच्चाधिकारियों से जो पत्र या नोटिफिकेशन आते हैं उनकी अधिकारी उन्हें भनक तक नहीं लगने देते हैं। उन्होंने कहा कि जबकि होना यह चाहिए कि सरकार व उच्चाधिकारियों से होने वाले पत्राचार प्रधानों के नाम से हो और उनकी प्रति अधिकारियों के नाम से होनी चाहिए ताकि सरकार की योजना व नीतियों को पालिका व परिषद के प्रधान अच्छी तरह से जनता तक पहुंचा सके।
इससे पूर्व नारनौल नप की चेयरपर्सन भारती सैनी की अध्यक्षता में सभी पालिका चेयरमैनों व प्रतिनिधियों की एक बैठक भी हुई। जिसमें भारती सैनी ने सभी को नववर्ष की बधाई दी। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश की सभी पालिका व परिषदों को विकास कार्यों के लिए अथाह बजट दिया गया है। जिसके चलते विकास कार्यों की झडी लगी है लेकिन फिलहाल सरकार में बैठे अधिकारियों द्वारा वर्तमान में जो निर्णय लिए जा रहे हैं वो जनहित में नहीं हैं। इसलिए सरकार को इन पर विचार करते हुए लोकल बाडीज को और अधिक मजबूत करना चाहिए।
इस मौके पर गोहना पालिका के चेयरपर्सन रजनी बिरमानी के प्रतिनिधि एवं यूनियन के प्रधान इंद्रजीत बिरमानी, नारनौल नगर परिषद की चेयरपर्सन भारती सैनी, दादरी परिषद के प्रधान संजय छापरिया, भिवानी परिषद के प्रधान रणसिंह यादव, महें्रद्रगढ पालिका के प्रधान रमेश बोहरा, कनीना पालिका के प्रधान सतीस जेलदार, तावडू पालिका चेयरपर्सन के प्रतिनिधि आशीष गर्ग, फरूखनगर पालिका चेयरपर्सन के प्रतिनिधि संदीप यादव, हेली मंडी पालिका के प्रधान सुरेश यादव, पटौदी पालिका के प्रधान चंद्रभान सिंह, सिवानी पालिका के प्रधान सुरेश खनगवाल, नांगल चौधरी पालिका चेयरपर्सन बबीता सैनी, लोहारू पालिका के प्रधान दौलत राम, चीका पालिका की चेयरपर्सन अमनदीप कौर, बवानी खेडा पालिका की चेयरपर्सन कांता किरण ओढ आदि उपस्थित थे।