भट्टा उद्योग की जटिल समस्याओं को नजरअंदाज किए जाने पर संपूर्ण भट्टा उद्योग आगामी सीजन हड़ताल पर ।

भट्टा उद्योग की जटिल समस्याओं को नजरअंदाज किए जाने पर संपूर्ण भट्टा उद्योग आगामी सीजन हड़ताल पर ।

अंबाला 3 अगस्त रवि पथ :

इंटो पर जीएसटी की बढ़ोतरी, कोयले की बढ़ती कीमतें, सरकारी निर्माण कार्य में लाली इंटो के उपयोग पर नित नए प्रतिबंध एवं श्रम दरों में अस्पष्टता आदि समस्याओं को लेकर हरियाणा प्रदेश ईट भट्टा एसोसिएशन ने अपनी प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक का आयोजन किया। कार्यकारिणी की बैठक की अध्यक्षता अजीत सिंह यादव प्रदेश अध्यक्ष की मौजूदगी में हुई। इस बैठक में समिति के चेयरमैन प्रमोद गुप्ता के साथ प्रदेश कार्यकारिणी के सभी पदाधिकारी एवं जिला समितियों के पदाधिकारियों ने भी भाग लिया। इस अवसर पर प्रदेश समिति के चेयरमैन प्रमोद गुप्ता ने सभा को संबोधित करते हुए कहाकि सरकार के ढुलमुल रवैया पर अभी हाल ही में 8 मार्च को मातृसंस्था आल इंडिया एवं टाइल निर्माता संघ के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन के बावजूद भी सरकारें इंट भट्टा की इन जटिलताओं को अनदेखा कर रही है। इसलिए आल इंडिया संघ ने संपूर्ण भारत वर्ष के भट्टा उद्योग के भविष्य पर चिंता जताते हुए आगामी सीजन के लिए देशव्यापी हड़ताल का आवाहन किया है। अत: हरियाणा प्रदेश को भी इस दिशा में आगे बढऩा चाहिए था कि सरकारी लघु एवं कुटीर उद्योग की परेशानियों पर ध्यान देते हुए सरकार को इनका निवारण करना चाहिए। उन्होंने बताया कि हरियाणा के एनसीआर क्षेत्र के भट्टा उद्योगों का भविष्य पहले से ही सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष विचाराधीन होना है और हरियाणा नान एनसीआर भट्टा उद्योग का भविष्य एनजीटी के फैसले से अंधकार में है। प्रदेश महासचिव रजनीश जैन ने कहाकि जीएसटी काउंसिल ने इंटो की कंपोजिशन स्कीम को समाप्त कर दिया है एंव कर दरों में भारी वृद्धि की है। भट्टो में निर्मित लाल इंटो पर कर दर बिना आईटीसी क्लेम किए 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 6 प्रतिशत तथा आईटीसी क्लेम पर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12 प्रतिशत किए जाने का जीएसटी काउसिल का प्रस्ताव केंदीय वित मंत्री ने 1 अप्रैल से
लागू कर दिया गया है तथा ईट भट्टों की थ्रेशहोल्ड लिमिट को 40 लाख से घटाकर 20 लाख कर दिया है जबकि देश में अन्य मैन्युफेैक्चर के लिए यह लिमिट 40 लाख है। इस लघु एवं कुटीर उद्योग पर जो कर दरों में वृद्धि हुई है, इसे सरकार को वापस लेना चाहिए। जबकि हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने भी कहा है कि जीएसटी काउंसिल के सुझावों को लागू करने के लिए सरकार बाध्य नहीं है। रजनीश जैन ने बताया कि भारत में थर्मल पावर प्लांट के बाद ईट भ_ा उद्योग दूसरा बड़ा कोयला उपभोक्ता है। इंटो को पकाने के लिए प्रमुख इंधन कोयला है, जिसकी कीमत में 1 वर्ष के दौरान 200 प्रतिशत से बढ़ाकर 250 प्रतिशत कर दी गई है। सरकार जैसे थर्मल प्लांट को कोयला उपलब्ध करवाती है, उसी तरह भट्टा उद्योग को भी आधार मूल्यों पर अच्छी गुणवत्ता के कोयले को उपलब्ध करवाने की नीति बनाए और एक अलग नोडल एजेंसी निर्धारित की जाए एवं कोयले की आनलाइन ट्रेडिंग के माध्यम से जो कालाबाजारी होती है, उस पर रोक लगाई जाए। उन्होंने कहाकि सरकार समय समय पर सरकारी कार्य में लाल ईंट के उपयोग पर प्रतिबंध लगाती रहती है एवं थर्मल प्लांट की राख द्वारा निर्मित ईंटो को सरकारी कामों में प्रोत्साहित किया जाता है। जिससे लाल ईंट उद्योग को बहुत नुकसान हो रहा है। भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र इस बात की पुष्टी करता है की थमाल पावर प्लाटं की राख से निर्मित इन ईंटों में परमाणु विकरण पद्धार्थ पाए जाते हैं ज़ो की मनुष्य की सेहत के लिए बहुत हानिकारक ह़ोते हैं। उन्होंने कहाकि श्रम राज्य विभाग द्वारा भट्टा उद्योग के लिए जारी किए जाने वाले श्रम दरों में भी बहुत अस्पष्टता है। भट्टा उद्योग में बहुत सा मशीनीकरण हुआ है, जिससे श्रमिकों की कार्य क्षमता में इजाफा हुआ है लेकिन श्रम विभाग आज भी पुराने पैटर्न पर श्रम दरों को सूचीबद्ध किए हुए हैं। इससे हर साल भट्टा मालिकों और श्रमिकों के बीच विवाद होता है। बार-बार पत्राचार और मीटिंग करने के बावजूद भी सरकार इस समस्या की अनदेखी कर रही है। प्रदेश भर में लगभग 3000 भट्टो पर 5 से 6 लाख श्रमिक हड़ताल अपना रोजगार पाते है। उनके भविष्य और वेरोजगारी के महत्त्व पूर्ण पहलू को भी सरकार नजरअंदाज कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष अजीत सिंह यादव ने सभा में सभी परेशानियों और जटिलताओं के कारण पूरे प्रदेश में भट्टा उद्योग का भविष्य अंधकार में है और सरकार ने नाकारत्मक रवैय पर चिंता जताते हुए आने वाल अगामीे सीजन के दौरान प्रदेश के सभी भट्टो पर हड़ताल रखने की हुंकार भरते हुए एक सुर में जिला समितियों ने सहमति जताई और कहाकि हड़ताल की अवधि के दौरान ईंटों की बिक्री तो जारी रहेगी, परंतु निर्माण कार्य बंद रहेगा।