कोरोना के दौरान शिक्षण, अनुसंधान व विस्तार की गतिविधियों पर हुई चर्चा

कोरोना के दौरान शिक्षण, अनुसंधान व विस्तार की गतिविधियों पर हुई चर्चा

एचएयू के होम साइंस कॉलेज की ओर से वेबिनार का आयोजन

हिसार : 13 जनवरी  रवि पथ :

चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के इंदिरा चक्रवर्ती गृह विज्ञान महाविद्यालय की पारिवारिक संसाधन प्रबंधन विभाग की ओर से कोरोना के दौरान के भविष्य की तैयारी के लिए शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार के परिप्रेक्ष्य में परिवर्तन विषय पर एक राष्ट्रीय वेबिनार आयोजित किया गया।
वेबिनार का आयोजन डॉ. प्रोमिला कृष्णा चहल ने किया। वेबिनार की चेयरपर्सन डॉ. मंजू मेहता ने शुभारंभ अवसर पर वेबिनार की अवधारणा के बारे में बताया। उन्होंने कोरोना के गृह विज्ञान में शिक्षण और सीखने के प्रभावों की चर्चा की। वेबिनार में छह मुख्य वक्ताओं ने अपने व्याख्यान दिए। जेएनवी विश्वविद्यालय, जोधपुर से सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. कुंजन त्रिवेदी ने सामुदायिक विज्ञान के बारे में अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। डॉ. सागर किसान वाडकर ने लैंगिक समानता हासिल करने में विस्तार विशेषज्ञों की उभरती भूमिका के विषय पर चर्चा की। डॉ. सविता राठौर ने कोरेाना के पश्चात की शिक्षण एवं सीखने की चुनौतियां और अवसर के बारे में विचार-विमर्श किया। साथ ही पोषण संबंधी हस्तक्षेप पर अपनी प्रस्तुति दी। डॉ. नयना शर्मा ने पोस्ट कोविड शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार को फिर से परिभाषित करने का अपना व्याख्यान दिया। डॉ. ज्योति जोशी ने मिश्रित शिक्षा को शिक्षण का एक प्रभावी उपकरण बताते हुए विस्तारपूर्वक बताया।
महामारी के दौरान उत्पन चुनौतियों को लेकर हुई चर्चा
वेबिनार में सभी मुख्य वक्ताओं ने शिक्षकों और छात्रों को शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार संबंधी गतिविधियों में आने वाली समस्याओं और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। शिक्षण, अनुसंधान और विस्तार के संभावित समाधान पर भी चर्चा की गई। साथ ही शिक्षण के संबंध में मिश्रित शिक्षा/छात्र केंद्रित शिक्षा, हाइब्रिड शिक्षा, तंत्रिका शिक्षा, मुक्त शैक्षिक संसाधन और फ़्िलप्ड कक्षा सीखने के तरीके का प्रयोग करके शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया में सुधार के बारे में बताया। कोरोना महामारी के दौरान अनुसंधान किसान केंद्रित होना चाहिए और किसान की उत्पादकता में सुधार के लिए विभिन्न तकनीकों और तरीकों का पता लगाया जाना चाहिए और विभिन्न क्षेत्रों में कोरोना के प्रभाव पर भी अध्ययन किया जाना चाहिए। विस्तार संबंधी गतिविधि के संबंध में वक्ताओं ने ग्रामीण लोगों से जुडऩे के लिए संपर्क-कनेक्टिविटी और संचार को सर्वोत्तम अभ्यास बताया।