राजा के समर्थकों को रास नहीं आ रही गुमनाम महकमे की चिट्ठी

राजा के समर्थकों को रास नहीं आ रही गुमनाम महकमे की चिट्ठी

खुशी से ज्यादा महकमे की जानकारी जुटाने में एनर्जी लगा रहे हैं समर्थक

मोदी कैबिनेट में राव इंदरजीत को भले ही अतिरिक्त विभाग की जिम्मेदारी सौंप दी गई हो लेकिन इस गुमनाम महकमे को लेकर उनके समर्थकों में ही असमंजसय हैं

राव का कद बढ़ने के बावजूद समर्थक नहीं मना पा रहे खुशी

राव को फिर सौपी गुमनाम से महकमें की कमान

पहले भी विरोधी महकमों को लेकर करते रहे हैं कटाक्ष

भूपेंद्र सिंह यादव को कैबिनेट में शामिल करना राव का कद छोटा करना बता रहा है विपक्ष

रेवाड़ी 10 जुलाई  रवि पथ :

7 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट विस्तार से पूर्व कैबिनेट में शामिल तमाम नेताओं के समर्थकों के चेहरे लटके हुए थे। समर्थकों को नहीं पता था कि किस नेता की नरेंद्र मोदी कब छुट्टी कर दे। हुआ भी यही प्रधानमंत्री ने कई दिग्गज नेताओं के इस्तीफे ले लिए जिन नेताओं के इस्तीफे लिए हैं उनके समर्थकों का मायूस होना तो लाजमी समझा जा सकता है लेकिन किसी नेता का मोदी कैबिनेट में कद बढ़ने के बावजूद भी समर्थक मायूस ही नजर आ रहे हैं। जी हां हम बात कर रहे हैं मोदी कैबिनेट में सांख्यिकीय और योजना क्रियान्वयन मंत्री व अपने आप को दक्षिणी हरियाणा का राजा कहलाने वाले राव इंद्रजीत सिंह का। पिछली मनमोहन सिंह की सरकार में विदेश राज्य मंत्री रहने के बाद राव इंदरजीत सिंह ने कांग्रेस को अलविदा कह दिया और भाजपा की गोद में बैठ गए। भाजपा में आने से पूर्व भी उनकी नजर लगातार प्रदेश के मुखिया बनने पर लगी रही लेकिन कांग्रेस में उन्हें यह मुकाम हासिल नहीं हो सका तो उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली। भाजपा में भी लगातार उनकी नजर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने पर लगी रही लेकिन यहां भी संभव नहीं हो पाया। भाजपा ने उन्हें लोकसभा का टिकट दिया और विजय का पताका फहरा कर पिछली बार मोदी कैबिनेट में रक्षा राज्य मंत्री व शहरी विकास मंत्रालय में भी राज्य मंत्री के पद पर रहे। इस बार उन्हें सांख्यिकीय और योजना क्रियान्वयन विभाग दिया गया। राव को मिले इन विभागों को लेकर विपक्ष लगातार उन पर कटाक्ष करती रही। राव के राजनीतिक घोर विरोधी पूर्व मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव लगातार उनके महकमे को लेकर उन पर कटाक्ष करते रहे हैं। कैप्टन कहते हैं कि राव के समर्थकों को यही नहीं पता कि उनके नेता के पास आखिर कौन सा महकमा है। इस बार कैबिनेट के विस्तार में राव इंदरजीत सिंह न केवल अपना महकमा बचाने में कामयाब हुए बल्कि उनका प्रमोशन करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कॉरपोरेट अफेयर्स का विभाग भी दे दिया गया। हालांकि राव समर्थकों को लग रहा था कि इस बार उनके नेता को कैबिनेट में जगह मिल सकती हैं लेकिन ऐसा नहीं हो सका उन्हें एक और महकमा दिया गया लेकिन इसके बावजूद भी समर्थकों के चेहरे नहीं खिले।

छोटी-छोटी बातों को लेकर उनके समर्थक शहर को होर्डिंग से पाट देने वाले बिल्कुल मायूस नजर आ रहे हैं। सभी समर्थकों के चेहरों पर उदासी ही नजर आ रही है। पद बचाने व एक अन्य महकमा मिलने के बावजूद कार्यकर्ताओं में खुशी नजर नहीं आ रही। विपक्ष अब भूपेंद्र यादव को कैबिनेट में शामिल करने को भी भाजपा द्वारा राव के पर काटने के रूप में देख रहा है। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ एमएल रंगा ने कहा कि भाजपा द्वारा भूपेंद्र सिंह यादव का कद ऊंचा कर राव इंदरजीत  के कद को छोटा किया जा रहा है। उनका कहना है की राव के कद का नेता तैयार किया जा रहा है।भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने राजस्थान से राज्यसभा सांसद भूपेंद्र यादव को ज्यादा तवज्जो देते हुए उन्हें हाल ही में कैबिनेट विस्तार करते समय उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। भूपेंद्र यादव मूल रूप से अहीरवाल के ही गुरुग्राम जिले से संबंध रखते हैं। हालांकि जनाधार के मामले में अहीरवाल क्षेत्र में अभी भूपेंद्र यादव का कद राव के कद से छोटा है। लेकिन जिस तरह से भाजपा ने राव के बराबर भूपेंद्र सिंह यादव को खड़ा किया है तो वह समय दूर नहीं जब यादव का कद भी या तो भूपेंद्र सिंह यादव के बराबर या उनसे बड़ा हो सकता है।
इसके बावजूद भाजपा ने राव को हाशिए पर लाने के लिए भूपेंद्र को आगे बढ़ा दिया है। समूचे अहीरवाल क्षेत्र में अपने मजबूत जनाधार के दम पर राव गत दोनों विधानसभा चुनावों के दौरान टिकटों का निर्धारण करने में अग्रणी भूमिका में रहे थे। राव की जिद के कारण गत विधानसभा चुनाव में भाजपा के कुछ सीटिंग एमएलए भी पार्टी की टिकट से वंचित रह गए थे। इस समय भाजपा हाईकमान की ओर से राव को एक तरह से दरकिनार किए जाने के प्रयास लगातार जारी हैं। अब राव भाजपा के खिलाफ विद्रोह की स्थिति में भी नहीं हैं। तमाम हालातों को देखते हुए राव फिलहाल चुप्पी साधे हुए हैं। यह बात जरूर है कि अगर भाजपा हाईकमान की ओर से राव के प्रति इसी तरह का रवैया अपनाया जाता रहा, तो आने वाले चुनावों से पहले वह अहीरवाल क्षेत्र में भाजपा को बड़ा झटका देने में संकोच नहीं करेंगे। भविष्य में कुछ भी हो लेकिन इस समय तो राव को मिले महकमों को लेकर समर्थक मायूस है तो नेता उनके महत्व को लेकर तंज कसते नजर आते हैं।