बारानी व सिंचित क्षेत्रों के अनुसार सरसों की किस्मों का चयन करें किसान : उपमंडल कृषि अधिकारी

बारानी व सिंचित क्षेत्रों के अनुसार सरसों की किस्मों का चयन करें किसान : उपमंडल कृषि अधिकारी

हिसार, 03 नवंबर  रवि पथ :

उपमंडल कृषि अधिकारी पवन ढींगड़ा ने बताया कि प्रदेश के बारानी व सिंचित क्षेत्रों के लिए सरसों की आरएच-30 किस्म पछेती बिजाई में भी अन्य किस्मों से अधिक पैदावार देती हैं। उन्होंने बताया कि इस किस्म की बिजाई 30 नवंबर तक की जा सकती है। इसकी औसत उपज 8 से 9 क्विंटल प्रति एकड़ तथा तेल की मात्रा 40 प्रतिशत हैं।
उपमंडल कृषि अधिकारी ने बताया कि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने सरसों फसल की अच्छी पैदावार के लिए विभिन्न प्रकार की किस्मों की सिफारिश की है। इनमें टी-59 भी सभी परिस्थितियों के लिए उपयुक्त किस्म है। इसकी औसत पैदावार सिंचित अवस्थाओं 8 से 9 क्विंटल प्रति एकड़ तथा तेल की मात्रा 40 प्रतिशत हैं। इसी प्रकार आरएच-781 किस्म पाला व सर्दी की सहनशील किस्म है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी औसत उपज 7 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ तथा तेल की मात्रा 40 प्रतिशत हैं। उन्होंने बताया कि आरएच-9801 किस्म भी पछेती बिजाई के लिए उत्तम किस्म है। इसकी औसत उपज 7 से 8 क्विंटल प्रति एकड़ हैं तथा तेल की मात्रा 40 प्रतिशत हैं।
उपमंडल कृषि अधिकारी ने बताया कि सिंचित क्षेत्र में प्रति एकड़ सवा किलोग्राम बीज ड़ालें। उन्होंने बताया कि सरसों की बिजाई शुद्ध फसल कतारों में 30 से.मी. के फासले पर 4 से 5 से. मी. गहरी देसी हल से पोरा या ड्रिल विधि से की जाए। पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 से.मी. रखी जाए। उन्होंने बताया कि किसान कृषि वैज्ञानिकों द्वारा की गई सिफारिश के अनुसार ही रासायनिक उर्वरकों का उपयोग करें। सरसों की अच्छी पैदावार लेने के लिए दो सिंचाइयां करनी चाहिए। एक सिंचाई फूल निकलने के समय और दूसरी सिंचाई फलियां लगने के समय करनी चाहिए।