चेयरपर्सन ज्योति बैंदा ने ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव करने का दिया सुझाव

September 13, 2020

प्रदेश के 4078 प्राइमरी व अपर प्राइमरी स्कूलों में नियुक्त नहीं है महिला टीचर, आयोग ने लिया संज्ञान,

चेयरपर्सन ज्योति बैंदा ने ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव करने का दिया सुझाव

चंडीगढ़, 13 सितम्बर रवि पथ : 

हरियाणा राज्य बाल अधिकार सरंक्षण आयोग ने प्रदेश के 4 हजार से भी ज्यादा स्कूलों में महिला टीचर नही होने पर चिंता जाहिर की है। आयोग ने हरियाणा सरकार को पत्र लिख कर प्रदेश के 4078 प्राइमरी व अपर प्राइमरी विद्यालयों में महिला टीचर की नियुक्ति नहीं होने बारे अवगत कराया है।
सरकार को लिखे पत्र में हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की चेयरपर्सन  ज्योति बैंदा ने सरकार से ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव करने का भी सुझाव दिया है ताकि इन स्कूलों में महिला टीचरों की नियुक्ति हो सके।
आयोग की चेयरपर्सन ज्योति बेंदा ने बताया है कि आयोग ने बीते दिनों शिक्षा निदेशालय से प्रदेश के 14000 स्कूलों का डाटा लेकर उसे एनालिसिस किया है। आयोग द्वारा किए गए एनेलिसिस में पाया गया है कि उक्त 14000 स्कूलों में से 4078 स्कूल ऐसे हैं जिनमें एक भी महिला टीचर नहीं है। खास बात यह है कि इन 4078 स्कूलों में से 3872 स्कूल प्राइमरी है अपर प्राइमरी हैं। इतना ही नहीं इनमें से 746 स्कूल मेवात केडर के हैं जिनमें से 487 स्कूलों में कोई भी महिला टीचर नियुक्त नहीं है।
आयोग के अनुसार इन स्कूलों में लड़कियों की संख्या अच्छी है। ऐसे में इन स्कूलों में महिला टीचर नहीं होने पर आयोग ने चिंता व्यक्त करते हुए सरकार को ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव करने वह उक्त स्कूलों में महिला टीचरों की नियुक्ति करने का सुझाव दिया है। आयोग चेयरपर्सन ने कहा कि स्कूल में महिला टीचर नहीं होने से एकेडमिक व एनरोलमेंट एंगेजमेंट प्रभावित होती है। इसके अलावा स्कूल में महिला टीचर होने से किशोर लड़किया ज्यादा कम्फर्ट महसूस करेंगी । उन्होंने बताया कि महिला टीचर नहीं होने से जेंडर लर्निंग भी प्रभावित हो सकती है। आयोग की चेयरपर्सन ने सरकार को सुझाव दिए हैं कि सरकार भी अपने स्तर पर स्कूलों के डाटा को वेरिफाई करे तथा जिन स्कूलों में महिला टीचर नहीं है उनका संज्ञान ले। ऐसा करने से सरकार की योजना बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ को भी बल मिलेगा।