लाखों शिक्षित बेरोजगार युवा नौकरी का कर रहे हैं इंतजार: अभय सिंह चौटाला

लाखों शिक्षित बेरोजगार युवा नौकरी का कर रहे हैं इंतजार: अभय सिंह चौटाला

न्यायालय द्वारा नौकरियों में धांधली के चलते भूपेंद्र हुड्डा और भाजपा के कार्यकाल में हुई अनेकों भर्तियां की जा चुकी हैं रद्द

पोस्ट ग्रेजुएट, इंजीनियर, डिप्लोमा इंजीनियर, आईटीआई, पैरामेडिकल, जेबीटी, बीएड, एमएड, पीटीआई और लैंगुएज प्रशिक्षण प्राप्त लाखों युवा हैं बेरोजगार

चंडीगढ़, 28 अप्रैल रवि पथ :

इनेलो प्रधान महासचिव एवं ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला ने कहा कि न्यायालय द्वारा नौकरियों में धांधली के चलते भूपेंद्र हुड्डा और भाजपा के कार्यकाल में हुई अनेकों भर्तियां रद्द की जा चुकी हैं। प्रदेश मेें वर्तमान समय में शिक्षा, स्वास्थ्य, जन स्वास्थ्य विभाग, रोडवेज और बिजली विभाग में ही स्थाई कर्मियों के करीब 1.5 लाख से अधिक पद खाली पड़े हैं। पोस्ट ग्रेजुएट, इंजीनियर, डिप्लोमा इंजीनियर, आईटीआई, पैरामेडिकल, जेबीटी, बीएड, एमएड, पीटीआई और लैंगुएज प्रशिक्षण प्राप्त लाखों शिक्षित बेरोजगार युवा नौकरी का इंतजार कर रहे हैं।
भाजपा सरकार ने पीजीटी संस्कृत के 626 एवं टीजीटी अंग्रेजी के 1035 पदों के लिए वर्ष 2015 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी लेकिन धांधली के आरोपों के चलते उसे फरवरी 2021 में रद्द कर दिया गया। जूनियर लेक्चर असिस्टेंट के 61 पदों की वर्ष 2017 में भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी लेकिन इस भर्ती को भी धांधली के आरोपों के चलते कोर्ट ने 2021 में रद्द कर दिया। बीते मंगलवार को हाईकोर्ट ने हरियाणा कर्मचारी चयन आयोग को फटकार लगाते हुए 4858 क्लर्क की भर्ती का परिणाम खारिज कर दिया।
भूपेंद्र हुड्डा सरकार के कार्यकाल में भर्तियों में धांधली के कारण कोर्ट ने कई बार भर्तियां रद्द की थी। 2010 में भर्ती किए गए 1983 पीटीआई, खेल कोटे से भर्ती किए गए 1518 युवा, वर्ष 2013 में गैरकानूनी ढंग से चयन किए गए 13 क्लर्क, चौ देवी लाल विश्वविद्यालय में 2009 में भर्ती किए गए लेब अटेंडेंट को माननीय कोर्ट ने निरस्त कर दिया था। वर्ष 2006 में भर्ती किए 816 आर्ट एंड क्राफ्ट अध्यापकों को 10 साल बाद नौकरी से निकाल दिया गया। जेबीटी, टीजीटी, पीजीटी, असिस्टेंट लेक्चरर की भर्तियों में बड़े पैमाने पर धांधली के चलते आवेदनकर्ता कोर्ट पहुंचे और भर्तियां अटक गई। भाजपा और हुड्डा के कार्यकाल के दौरान भर्तियां करते समय वांछित प्रक्रिया को पूर्ण रूप से अमलीजामा नहीं दिया गया जिसकी वजह से यह मामला न्यायालय में चला गया और प्रदेश का युवा रोजगार से वंचित रह गया।