बजट मे देश के किसानों के लिए कुछ भी नहीं केवल आंकड़ेबाजी है :- गुरनाम सिंह चढूनी

बजट मे देश के किसानों के लिए कुछ भी नहीं केवल आंकड़ेबाजी है :- गुरनाम सिंह चढूनी

रवि पथ न्यूज़ :

वित्त मंत्री के भाषण से स्पष्ट था कि किसान आंदोलन से हार से तिमिलाई हुई सरकार किसानों से बदला लेने पर आमादा है। वित्त मंत्री के भाषण में उन्होंने आंकड़े नहीं दिए लेकिन बजट के आंकड़े आते ही हकीकत स्पष्ट हो गई:

कृषि और उससे जुड़े हुए क्षेत्रों का कुल बजट पिछले साल के 4.26% से घटाकर इस वर्ष 3.84% कर दिया गया है
ग्रामीण विकास का बजट पिछले साल 5.59% से घटाकर इस वर्ष 5.23% कर दिया गया है
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का बजट पिछले साल 16000 करोड रुपए से घटाकर इस साल 15500 करोड रुपए कर दिया गया है।
मनरेगा में पिछले साल खर्च हुआ था 97,034 करोड रुपए लेकिन इस साल का बजट है मात्र 72,034 करोड़ रूपया
किसानों को फसल का दाम मिल सके उसके लिए सरकार की पी एस एस और एमआईएस स्कीम में पिछले साल खर्च हुआ 3595 करोड़ रूपया लेकिन इस साल का बजट है 1500 करोड़
किसानों को एमएसपी दिलवाने के लिए अरुण जेटली द्वारा बनाई गई स्कीम आशा का बचत घर आकर पिछले साल 400 करोड रुपए करें किया गया था लेकिन इस बार उसे घटाकर नाम मात्र को सिर्फ 1 करोड़ रूपया कर दिया गया है
agri infrastructure fund में सरकार का योगदान पिछले साल 900 करोड़ से घटाकर इस साल 500 करोड़ कर दिया गया है
सरकार को ऑपरेटिव को समर्थन देने की बात करती है लेकिन फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन के लिए बजट पिछले साल 700 करोड़ से घटाकर इस साल 500 करोड़ कर दिया गया है
पराली जलाने को रोकने के लिए किसान को सहायता देने के लिए पिछले साल 700 करोड़ का बजट था जो इस साल घटाकर शून्य कर दिया गया है। *राकेश कुमार बैंस मिडिया प्रभारी*