बजट में महंगाई, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र की हुई अनदेखी : अभय सिंह चौटाला

बजट में महंगाई, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र की हुई अनदेखी : अभय सिंह चौटाला

बजट को किसान, मजदूर, छोटा व्यापारी, कर्मचारी, पेंशनधारियों, और आम आदमी विरोधी बताया

मनरेगा, स्वच्छ भारत ग्रामीण योजना, मूल्य स्थिरीकरण (प्राइस स्टेबलाईजेशन), सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत दी जाने वाली खाद्य सब्सिडी, एफसीआई जो किसान का अन्न खरीदने वाली एजेंसी है, उस पर दी जाने वाली खाद्य सब्सिडी, रसोई गैस सब्सिडी, गरीब परिवारों को दिए जाने वाले गैस कनैक्सन सब में की गई भारी कटौती

नौकरी पेशा लोगों को टैक्स स्लैब में कोई छूट नहीं

चंडीगढ़, 1 फरवरी  रवि पथ :

इंडियन नेशनल लोकदल के प्रधान महासचिव एवं ऐलनाबाद के विधायक अभय सिंह चौटाला ने केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा 2022-23 के लिए पेश किए गए बजट को किसान, मजदूर, छोटा व्यापारी, कर्मचारी, पेंशनधारियों, और आम आदमी विरोधी बताते हुए कहा कि इस बजट में महंगाई कम करने, युवाओं को रोजगार देने, शिक्षा, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किए गए हैं सिर्फ खोखले दावे किए गए हैं।
अभय सिंह चौटाला ने कहा कि आज बेरोजगारी अपने चरम पर है और पेश किए गए बजट के आंकड़े स्वयं इस बात के गवाह हैं कि मनरेगा से जो रोजगार गरीब तबके को दिया जाता है उस में भारी कटौती की गई है। 2020-21 में मनरेगा के लिए 1 लाख 11 हजार 170 करोड़ रूपए खर्च किए गए थे जो कि घटा कर 2021-22 में 98 हजार करोड़ रूपए कर दिए गए थे और अब 2022-23 के लिए फिर और ज्यादा घटाकर 73 हजार करोड़ रूपए कर दिए गए हंै। एक तरफ तो भाजपा सरकार रोजगार बढ़ाने का झूठ फैला रही है, दूसरी तरफ जो रोजगार मिलता था उसे ही खत्म कर रही है।
स्वच्छ भारत ग्रामीण योजना के लिए भी बजट में राशि को घटा दिया गया है जो 2020-21 में 9998 करोड़ रूपए थी उसको 2022-23 के लिए घटा कर 7192 करोड़ रूपए कर दिया गया है। मतलब साफ है कि स्वच्छता भाजपा सरकार की प्राथमिकता नहीं है।
मूल्य स्थिरीकरण (प्राइस स्टेबलाईजेशन) जिसमें महंगाई रोकने के लिए बजट का प्रावधान किया जाता है उसे बढ़ाया जाना चाहिए था लेकिन उसमें भारी कटौती की गई है। 2020-21 में 11135 करोड़ रूपए खर्च किए गए थे जो घटाकर 2021-22 में 2700 करोड़ रूपए कर दिए गए और अब 2022-23 के लिए उसे घटाकर मात्र 1500 करोड़ रूपए कर दिए गए हैं।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत खाद्य सब्सिडी जो 2020-21 में 78338 करोड़ रूपए थी उसे 2021-22 में घटाकर 75290 करोड़ कर दिया गया था अब उसे और घटाकर 60561 करोड़ रूपए कर दिया गया है। इससे साफ है कि देश की जो गरीब जनता है उनको पेट भरने के लिए जो भोजन दिया जाता है उसमें भी भारी कटौती कर दी गई है।
एफसीआई जो किसान का अन्न खरीदने वाली एजेंसी है उस पर दी जाने वाली खाद्य सब्सिडी में भारी कटौती की गई है। 2020-21 में 4 लाख 62 हजार 779 करोड़ रूपए खाद्य सब्सिडी दी गई थी जिसको 2021-22 में घटाकर 2 लाख 10 हजार 929 करोड़ रूपए कर दिया गया था अब 2022-23 के बजट में घटाकर 1 लाख 45 हजार 920 करोड़ रूपए का दिया गया है। मतलब साफ है कि किसानों की आय दोगुनी करने का दावा खोखला साबित हुआ है।
रसोई गैस सब्सिडी जो डायरेक्ट बैनिफिट ट्रांसफर स्कीम के तहत दी जाती है उसे भी घटा दिया गया है। 2020-21 में 23667 करोड़ रूपए की सब्सिडी दी गई थी जिसे 2021-22 में घटाकर 12480 करोड रूपए कर दिया गया था अब 2022-23 के लिए इसे घटाकर मात्र 4 हजार करोड़ रूपए कर दिया गया है। वहीं गरीब परिवारों को दिए जाने वाले गैस कनैक्सन के लिए 2020-21 में 9235 करोड़ रूपए खर्च किए गए थे जिसे घटाकर 2021-22 में 1618 करोड़ रूपए कर दिया गया था और अब 2022-23 के लिए सिर्फ 800 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
लॉकडाउन में जिन लाखों लोगों के रोजगार छिन गए थे उनके लिए बजट में कोई प्रावधान नहीं किया गया। नौकरी पेशा लोगों को टैक्स स्लैब में कोई छूट नहीं दी गई। कुल मिलाकर यह बजट आम आदमी के लिए बजट न होकर कार्पोरेट घरानों के लिए बनाया गया बजट है।