एड्स कंट्रोल कर्मचारी पहली बार विश्व एड्स दिवस को मनाएंगे काला दिवस

एड्स कंट्रोल कर्मचारी पहली बार विश्व एड्स दिवस को मनाएंगे काला दिवस

1 दिसम्बर  रवि पथ :

विश्व एड्स दिवस यानी 1 ऐसा दिन जो एड्स कंट्रोल डिपार्टमेंट में सभी कर्मचारियों द्वारा हर साल 1 त्योहार की तरह ही मनाया जाता है ।इसकी तैयारियां काफी लम्बे समय से ही शुरू हो जाती है तथा हर कर्मचारी इसमें अपनी भागीदारी बड़े उत्साह से निभाता आया है परन्तु भारत सरकार द्वारा संचालित नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन द्वारा पिछले 20 सालों से पूरे देश में सेवाएं दे रहे अनुबंधित कर्मचारियों का केवल शोषण हो रहा है ।अनुबंधित कर्मचारी अब इतने मजबूर हो चुके है कि अपने इतने महत्वपूर्ण दिन को भी काला दिवस के रूप में मना रहे हैं तथा राष्ट्रीय स्तर पर धरने पर जा रहे हैं ।इस काले दिवस की मुहिम की शुरुआत 25 नवम्बर से ही पूरे हरियाणा प्रदेश में हो चुकी है जिसके तहत सभी अनुबंधित कर्मचारी काला रिबन बांधकर अपना कार्य कर रहे हैं तथा 1 दिसम्बर को अपना कार्य बंद करके अपने अपने जिला मुख्यालय तथा दिल्ली जंतर मंतर पर विरोध स्वरूप धरना प्रदर्शन करेंगे। काला दिवस की मुहिम में सभी कर्मचारी काले कपड़े पहनकर या काले रिबन लगाकर विरोध प्रदर्शन करेंगे। कर्मचारियों का यह रोष 2 साल का नहीं बल्कि 20 सालों के शोषण का नतीजा है ।सन 2002 में एड्स कंट्रोल डिपार्टमेंट में काउंसिलिंग टेस्टिंग शुरू हुई तब अनुबंधित कर्मचारी को 6500₹ मिलते थे ।धीरे धीरे प्रोग्राम का विस्तार हुआ तथा कार्य का स्तर बढ़ा परन्तु कर्मचारियों की सैलरी नाम मात्र बढ़ी । पहले एचआईवी टैस्टिंग और काउंसिलिंग 7000 के लगभग होती थी जो 10 गुना बढ़कर बढ़ लाखों में हो गई है। सन 2021 तक आते आते 10000000 से भी ज्यादा लोगों को काउंसलिंग व टैस्टिंग की सुविधाएं दे चुके हैं ।नैको ने सन 2022 में हरियाणा राज्य को 1500000 टैस्टिंग का लक्ष्य दिया है जिसे पूरा करना उन अनुबंधित कर्मचारियों को है जिसकी बेसिक सैलरी 13000₹ है जो डी सी रेट के एंप्लॉयीज की सैलरी के बराबर भी नहीं है ।नैको की नई पॉलिसी यानी फेज रिवाइज होता है जिसमें नई नई नीतियां व कार्यक्रम लागू होते हैं तथा कर्मचारियों की सैलरी भी रिवाइज होती है। नाको द्वारा 2017 में एनएसीपी 5 लागू करना था परन्तु वह आज 2021 तक लागू नहीं किया गया ।कर्मचारियों को उम्मीद थी कि 1 दिसम्बर 2017 में फेज चेंज होगा सैलरी बढ़ेगी परन्तु 5 साल से इंतजार कर रहे कर्मचारियों का सब्र का बांध टूट गया है ।वर्तमान में हरियाणा प्रदेश में 117 आईसीटीसी सेंटर ,11 एआरटी सेंटर ,5 एफआईएआरटी सेंटर, 4 एलएसी सेंटर, 32 एसटीआई क्लीनिक, 9 ओ एस टी सेंटर्स हैं जो कि हेल्थ डिपार्टमेंट का महत्वपूर्ण हिस्सा है। हरियाणा प्रदेश में 35000 के लगभग एचआईवी पीडि़त मरीज रजिस्टर्ड हैं जिनकी साइकोलोजिकल काउंसिलिंग ,दवाईयां तथा समय समय पर जांच आदि सुविधाएं दी जा रही है ।अगर हम पिछले सालों पर नजर डालें तो सिर्फ 2013 में 1 बार ऐसा हुआ था जब हमारा एआरटी सेंटर बंद हुआ था और मरीज़ों की दवाइयां नहीं मिल पाई थी क्योंकि हमारे लिए एचआईवी पीडि़त मरीज सर्वोपरि हैं ।एचआईवी पीड़ित गर्भवती की जांच के दिन से लेकर उसकी एआरटी मैडिसन उसकी डिलीवरी उसके बच्चे की दवाईयां बच्चे की समय समय पर जांच करके एचआईवी पीड़ित मां से बच्चों को होनेवाले ट्रांसमिशन को रोकना हम सभी कर्मचारियों का प्रथम कर्तव्य रहा है ।हमारे एसटीआई क्लीनिक हर महीने 12000 से ज्यादा मरीजों को यौन संक्रमण से सम्बन्धित बीमारियों की दवाइयां व जांच करवा रहे हैं ।ओएसटी सेंटर सप्ताह सातों दिन खुलता है जो सुई का नशा छोड़ चुके मरीजों को दवाइयां उपलब्ध कराता है तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा में जोड़ने का कार्य करता है ।आईसीटीसी सेंटर में सभी गर्भवती महिलाओं ,टीबी मरीज, एसटीआई मरीज ,सभी सर्जरी के केस तथा हाई रिस्क ग्रुप जैसे सेक्सवर्कर ,एमएसएम ,की काउंसलिंग तथा टेस्टिंग की जाती है। इसके अलावा समय समय पर कैम्प लगाकर लोगों को जागरुक करने का कार्य किया जाता है ।हरियाणा के सभी कॉलेज ,शैक्षणिक संस्थान ,आई टी आई ,पॉलीटेक्निक आदि में युवाओं को इस गम्भीर बीमारी के विषय में जागरूक किया जाता है ।
करोना के समय में भी जब पूरा विश्व इस भयंकर महामारी से जूझ रहा था तब स्वास्थ्य विभाग का अहम हिस्सा होते हुए हमने भी करोना पीडि़त मरीजों को काउंसलिंग देकर डर से उबारा था ।लैब टेक्नीशियन ने कोरोना जांच में दिन रात ड्यूटी की थी ।लोग डाउन में शेल्टर होम्स में रह रहे शरणार्थियों को मानसिक सांत्वना देने का कार्य भी इन कर्मचारियों ने किया था ।कोरोना पॉजिटिव मरीजों की काउंसिलिंग न केवल आइसोलेशन वार्ड में की गई बल्कि घर घर जाकर भी उनको मानसिक सहायता प्रदान की गई थी ।परन्तु यहां पर भी हमारे कर्मचारियों के साथ भेदभाव हुआ क्योंकि हरियाणा सरकार ने केवल एनएचएम विभाग के कर्मचारियों को ही करोना योद्धा मान कर 5000₹ प्रोत्साहन राशि दी गई ।
आज के इस महंगाई के दौर में जब सभी आवश्यक वस्तुओं के दाम १० गुना बढ़ गए हैं तब भी इन अनुबंधित कर्मचारियों को वेतन के नाम पर केवल 13000₹ से ही शुरुआत करनी पड़ती है ।कर्मचारी कोरोना तथा महंगाई दोनों से जूझ रहा है। इतनी कम सैलरी में हम सब कर्मचारी कैसे घर चलाएं तथा कैसे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दे ।
सन 2020 में नाको द्वारा विभाग में कार्यरत मैडीकल आफिसर की सैलरी को ही बढ़ाया गया ,अन्य अनुबंधित कर्मचारियों को
नैको से पे रिवीजन के नाम पर केवल आश्वासन ही मिलता है ।परन्तु अब कर्मचारी इन सब से ऊब चुका है। अब वह न्याय चाहता है ।
दूसरों को मानसिक सहायता देने वाला कर्मचारी अब अपनी ही मनोदशा को लेकर संशय में हैं। करोड़ों लोगों को भावात्मक सुरक्षा व सहायता प्रदान करने वाला अनुबंधित कर्मचारी अब इस स्थिति में पहुंच चुके है कि इन्हें ही मानसिक व सामाजिक सहायता की आवश्यकता पड़ने लगी है। हमारी भारत सरकार व हरियाणा सरकार दोनों से करबद्ध प्रार्थना है कि इन बेचारे कर्मचारियों की भी सुध ली जाए ।