भूपेंद्र हुड्डा ने धान की सरकारी खरीद बंद करने पर जताई कड़ी आपत्ति

भूपेंद्र हुड्डा ने धान की सरकारी खरीद बंद करने पर जताई कड़ी आपत्ति

कहा- देरी से खरीद शुरू और जल्द खरीद बंद करने से किसानों को नहीं मिल रही एमएसपी

औने-पौने दामों पर प्राइवेट एजेंसियों को फसल बेचने के लिए मजबूर हैं किसान- हुड्डा

बीजेपी-जेजेपी सरकार में ना किसानों को एमएसपी मिल रही, ना खाद और ना ही मुआवजा- हुड्डा

चंडीगढ़  रवि पथ :

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने धान की सरकारी खरीद बंद किए जाने पर कड़ी आपत्ति दर्ज की है। हुड्डा का कहना है कि इस तरह के फैसले लेकर बीजेपी-जेजेपी सरकार लगातार किसानों के साथ खिलवाड़ कर रही है। धान की खरीद देरी से शुरू करके सरकार किसानों को पहले ही बहुत नुकसान पहुंचा चुकी है। इसकी वजह से बड़ी तादाद में किसानों को एमएसपी नहीं मिल पाई। उन्हें औने-पौने दामों पर अपनी फसल प्राइवेट एजेंसियों को बेचनी पड़ी।

अब सरकार ने अचानक से काफी मंडियों में खरीद बंद करने का एलान कर दिया। जबकि अभी सभी किसानों ने अपनी फसल नहीं बेची है। बड़ी तादाद में किसान अपनी फसल लेकर मंडियों में पहुंच रहे हैं। अगर इस तरह सरकारी खरीद बंद होती है तो किसानों को एमएसपी नहीं मिल पाएगी और वह बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे।

हुड्डा ने कहा कि सरकार विज्ञापनों में तो फसल का दाना-दाना खरीदने की बात करती है लेकिन धरातल पर वह खरीद से भागती नजर आती है। धीरे-धीरे करके सरकार एमएसपी को खत्म करने की योजना पर काम कर रही है। स्पष्ट है कि सरकार के दावे और आश्वासन महज कागजी हैं।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि कई दिनों से प्रदेश में खाद संकट गहराया हुआ है। 1-1 कट्टा खाद के लिए किसान दर-बदर भटक रहे हैं। लेकिन सरकार रोज मीडिया के सामने कोई किल्लत नहीं होने का ढिंढोरा पीटती रहती है। इससे स्पष्ट है कि सत्ता में बैठे हुए लोग धरातल से कट चुके हैं। उनको आम जनमानस की समस्याओं से कोई वास्ता नहीं है और वो जानबूझकर इसकी अनदेखी कर रही है।

हुड्डा ने कहा कि किसानों को एमएसपी और खाद की तरह बेमौसम बारिश व जलभराव से हुए नुकसान का मुआवजा भी नहीं मिल रहा है। नुकसान की भरपाई के लिए कोई सामने नहीं आ रहा। बीमा कंपनी और सरकार दोनों ही अपना पल्ला झाड़ रहे हैं। जरूरतमंद किसानों के आवेदन तक स्वीकार नहीं हो रहे हैं। गठबंधन सरकार में ना किसानों को एमएसपी मिलती, ना वक्त पर खाद और ना ही खराबे का मुआवजा। यानी हर मोर्चे पर ये सरकार विफल नजर आ रही है।